संविधान और सेकुलरिज्म बचाना होगा, भाषाई और धार्मिक राजनीति देश के लिए खतरा: आज़मी

Abu Azmi: मीरारोड में आयोजित जनसभा में अबू आसिम आज़मी ने संविधान और सेकुलरिज्म की रक्षा की अपील करते हुए भाषाई और धार्मिक राजनीति को देश के लिए खतरा बताया।
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Abu Azmi statement (सोर्स-ः सोशल मीडिया)
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Mira Road Rally: मीरारोड में आयोजित एक जनसभा में अबू आसिम आज़मी ने केंद्र सरकार और मौजूदा राजनीतिक माहौल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में सेकुलरिज्म को बचाना आज सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और लोगों को डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करना चाहिए। आज़मी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार संविधान में बदलाव कर देश को “हिंदू राष्ट्र” बनाने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हुआ तो देश की एकता और सामाजिक संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

सभा का आयोजन रसाज़ ग्रुप के सीएमडी हाजी रईस अहमद द्वारा किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आज़मी ने भाषावाद की राजनीति को “ओछी राजनीति ” करार देते हुए कहा कि आजादी के समय हिंदी को प्रमुख स्थान देने की बात कही गई थी, लेकिन आज अंग्रेजी का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि उच्च न्यायालयों में अभी भी हिंदी या मराठी को क्यों प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी मजदूरों को निशाना बनाना गलत है, क्योंकि यही वर्ग देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है। अगर ये मजदूर चले गए तो काम रुक जाएगा और विकास थम जाएगा।

मराठी मुद्दे पर संतुलित बयान

आज़मी ने मराठी भाषा के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्हें मराठी पर गर्व है, लेकिन बाहरी लोगों के साथ भेदभाव करना सही नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि जो लोग मराठी नहीं जानते, उन्हें सिखाया जाए ताकि वे समाज में बेहतर ढंग से जुड़ सकें।

हालिया हमले पर प्रतिक्रिया

हाल ही में धर्म पूछकर दो वॉचमैन पर हुए हमले का जिक्र करते हुए आज़मी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि घटना के दूसरे पहलू को क्यों नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने वाला एक मुस्लिम युवक था, लेकिन इस तथ्य को सामने नहीं लाया गया। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठाती है जिससे समाज में हिंदू-मुस्लिम तनाव बढ़े। साथ ही उन्होंने कहा कि आरोपी युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती और इस घटना को सांप्रदायिक रंग देना गलत है।

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