MBMC स्टॉल आवंटन में बड़ा खेल ! महासभा में अवैध स्टॉल्स पर हंगामा, 12 लाख रुपए टैक्स भरने वाले को मिला स्टॉल

Mira Bhayandar Illegal Encroachment Action: मीरा-भाईंदर मनपा में दिव्यांग व गोटई स्टॉल आवंटन में अनियमितता पर जमकर हंगामा हुआ। महापौर डिंपल मेहता ने जांच के आदेश देकर एक महीने में रिपोर्ट मांगी है।
Major irregularities in MBMC stall allocation; uproar in the General Body meeting over illegal stalls
भाईंदर महानगरपालिकासोर्स- सोशल मीडिया
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Mira Bhayander Municipal Corporation: मीरा-भाईंदर, (सं।) मीरा-भाईंदर मनपा की गुरुवार को हुई महासभा में दिव्यांग, दूध केंद्र और गटई स्टॉल्स के आवंटन में अनियमितता को लेकर जमकर हंगामा हुआ। जरूरतमंदों के लिए बनाई गई योजना में कथित अनियमितताओं और स्टॉल के दुरुपयोग के आरोपों ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सदन ने स्टॉल आवंटन और मंजूरी के लिए नई नीति निर्धारित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

लाखों रुपए टैक्स चुकाने वाला पात्र कैसे माना गया

प्रभाग समिति क्रमांक-6 के सभापति प्रशांत दलवी ने महासभा में आरोप लगाया कि मीरा रोड में अब्दुल करीम शेख नामक व्यक्ति को जरूरतमंद बताकर स्टॉल आवंटित किया गया। उनके अनुसार संबंधित व्यक्ति कई संपत्तियों का मालिक है, पानी और होटल के कारोबार से जुड़ा है तथा मनपा को सालाना करीब 12 लाख रुपए प्रॉपर्टी टैक्स चुकाता है। दलवी ने सवाल उठाया कि यदि स्टॉल योजना गरीब, दिव्यांग, बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों के लिए है तो ऐसे व्यक्ति को पात्र कैसे माना गया? मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर डिंपल मेहता ने जांच के निर्देश दिए।

एक व्यक्ति के नाम 5-5 स्टॉल भाजपा नगरसेवक संजय थरथरे ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर 5-5 स्टॉल तक आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन वस्तुओं की बिक्री के लिए स्टॉल की अनुमति दी गई है, उसके बजाय कई जगह बीड़ी, सिगरेट और प्रतिबंधित गुटखा बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि स्टॉल मनपा की अनुमति से लगाए जाते हैं तो रात के अंधेरे में चोरी-छिपे क्रेन की मदद से स्टॉल क्यों लगाए जाते हैं?

500 मीटर की दूरी का नियम भी नहीं हो रहा लागू

  • नगरसेविका स्नेहा पांडे ने रामदेव पार्क और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के आसपास के स्टॉल्स का मुद्दा उठाया।

  • उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार दो स्टॉल्स के बीच 500 मीटर की दूरी होनी चाहिए, लेकिन कई जगह इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

  • नगरसेवक सुरेश खंडेलवाल समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी आरोप लगाया कि पहले से निर्धारित स्टॉल आवंटन नीति का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो रहा है।

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तीसरी बार महासभा में उठा अवैध स्टॉल्स का मुद्दा

महासभा में यह भी बताया गया कि करीब 418 स्टॉल्स की अनुमति लंबित है, जबकि शहर में लगभग 200 वैध स्टॉल होने की जानकारी सामने आई। नगरसेवकों ने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में स्टॉल फुटपाथ पर स्थापित है। इससे पैदल चलने वाले नागरिकों को परेशानी होती है। कांग्रेस के नगरसेवक अनिल सावंत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि फुटपाथ नागरिकों के निर्बाध आवागमन के लिए उपलब्ध होना चाहिए। नगरसेवक भगवती शर्मा ने भाईंदर पश्चिम के 60 फुट रोड पर गणेश मंदिर के पास मनपा द्वारा आवंटित स्टॉल में सैलून संचालित किए जाने का मुद्दा भी सदन में उठाया।

200 स्टॉल धारकों के दस्तावेजों की दोबारा जांच

महासभा में उठे आरोपों के बाद पहले से आवंटित स्टॉल्स की पात्रता की दोबारा जांच की दिशा में भी कदम उठाए जाने की बात सामने आई है। इसमें लाभार्थियों के दस्तावेज, आय, व्यवसाय और पात्रता की जांच किए जाने की मांग है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्टॉल वास्तव में जरूरतमंदों को ही मिले हैं या नहीं, हालांकि, संबंधित लाभार्थियों की पात्रता और आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।

नई नीति में पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रिया पर जोर

भविष्य में स्टॉल आवंटन को लेकर विवाद और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए नई नीति तैयार की जा रही है। इसमें आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने, दस्तावेजों की डिजिटल जांच व लाभार्थियों के बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पात्रता में पारदर्शिता लाना और फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी अथवा अधिकारियों की कथित मिलीभगत जैसी शिकायतों पर रोक लगाना है।

अब अतिक्रमण विभाग करेगा स्टॉल्स की जांच

MBMC आयुक्त राधाबिनोद शर्मा ने बाताया की पहले स्टॉल आवंटन और लाइसेंस देने की जिम्मेदारी संपत्ति विभाग के पास थी। अब यह जिम्मेदारी अतिक्रमण विभाग को सौंप दी गई है। विभाग सबसे पहले यह जांच करेगा कि शहर में कितने स्टॉल बिना अनुमति के लगाए गए हैं और कितने वैध स्टॉल्स का निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में इस्तेमाल हो रहा है। जांच के बाद अवैध स्टॉल्स के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाएगा। इसके साथ ही जनसंख्या घनत्व और स्थानीय जरूरत के आधार पर यह भी तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कितने स्टॉल की आवश्यकता है और कितने स्टॉल्स को अनुमति दी जा सकती है।

महापौर ने दिया एक माह का अल्टीमेटम महापौर डिंपल विनोद मेहता ने बाताया की प्रशासन को अवैध स्टॉल्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक माह की समय-सीमा दी है। अगली महासभा में शहर में कितने अवैध स्टॉल पाए गए, कितनों पर कार्रवाई हुई और कितने वैध स्टॉल्स के दुरुपयोग के मामले सामने आए, इसकी सटीक रिपोर्ट सदन के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

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