मीरा भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
ठाणे

RTI खुलासा: मीरा-भाईंदर मनपा में फर्जी रिपोर्ट देने वाले इंजीनियर को सजा नहीं, मिला सेवा विस्तार

Mira Bhayandar Municipal में फर्जी स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट देने के बावजूद इंजीनियर पर कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उसे सेवा विस्तार दे दिया गया। RTI खुलासे के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अपूर्वा नायक

Mira Bhayandar Fake Audit RTI: मीरा भाईंदर मनपा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी संरचनात्मक लेखापरीक्षा रिपोर्ट देने वाले इंजीनियर पर कार्रवाई करने के बजाय उसे 2028 तक सेवा विस्तार दे दिया गया।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) से हुए खुलासे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, मनपा पैनल के (स्ट्रक्चरल ऑडिटर) संरचनात्मक लेखा परीक्षक मधु मिश्रा ने मीरा रोड स्थित एक बार और होटल के निर्माण को लेकर गलत रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में इमारत को भूतल के साथ दो मंजिला बताया गया, जबकि वास्तविकता में ऐसी मंजिलें मौजूद ही नहीं थीं। इसी आधार पर मरम्मत की अनुमति भी दे दी गई।

गलती स्वीकार, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई कि रिपोर्ट गलत थी और इंजीनियर ने अपनी गलती भी स्वीकार की, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद न तो कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और न ही निलंबन। उल्टा, मधु मिश्रा को 9 जुलाई 2025 से 8 जुलाई 2028 तक का कार्यकाल विस्तार दे दिया गया।

प्रभाग भी लापरवाही उजागर अधिकारियों की

मामले में केवल लेखा परीक्षक ही नहीं, बल्कि तत्कालीन प्रभाग अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। नियमों के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद स्थल का निरीक्षण जरूरी था, लेकिन बिना जांच किए ही अधिकारियों ने रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए मरम्मत की अनुमति दे दी।

अनधिकृत निर्माण को मिला बढ़ावा

आरटीआई के जरिए यह भी खुलासा हुआ कि मरम्मत की अनुमति मिलने के बाद संबंधित बार और होटल में अतिरिक्त मंजिलों का अवैध निर्माण कर लिया गया। यानी एक गलत रिपोर्ट और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर अवैध निर्माण को खुली छूट दे दी।

आरटीआई कार्यकर्ता नितिन नाइक ने इस पूरे मामले को उजागर करते हुए मनपा को पत्र लिखकर दोषी इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पद का दुरुपयोग है।

प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने मनपा की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए है। जहां एक ओर फर्जी रिपोर्ट देने की बात स्वीकार की गई, वहीं दूसरी ओर दोषियों को संरक्षण मिलता नजर आ रहा है।

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