‘मराठी जरूरी’ व दस्तावेजों की जांच विवाद में अंडरवर्ल्ड की एंट्री, आरटीओ अधिकारी को बिश्नोई गैंग की धमकी !
Pratap Sarnaik: मीरा-भाईंदर में ऑटो रिक्शा चालकों के लिए ‘मराठी अनिवार्य’ नीति और दस्तावेज जांच को लेकर चल रहे विवाद के बीच आरटीओ अधिकारी को कथित तौर पर बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी मिली है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Marathi Mandatory Controversy (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mira Bhayandar Marathi Mandatory Controversy: मुंबई से सटे मीरा-भाईंदर में ‘मराठी अनिवार्य’ नीति को लेकर छिड़ा विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के प्रस्ताव ने ‘मराठी बनाम अमराठी’ बहस को तेज कर दिया है, और अब इसमें कथित तौर पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह का नाम जुड़ने से सियासी और प्रशासनिक हलचल और बढ़ गई है। रविवार को मीरा-भाईंदर क्षेत्र में उप प्रादेशिक आरटीओ अधिकारी प्रसाद नलावडे को एक धमकी भरा फोन आया।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह धमकी ऑटो रिक्शा से संबंधित कागजात और दस्तावेजों की जांच तथा मराठी अनिवार्यता के विरोध में दी गई बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरटीओ विभाग द्वारा काशीगांव पुलिस थाने में एनसीआर दर्ज की गई है।
फर्जी दस्तावेजों की जांच के निर्देश
बता दें कि हाल ही में राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मुंबई में ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा जानना जरूरी और फर्जी दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी संकेत दिए थे कि नियम का पालन न करने पर परमिट रद्द किए जा सकते हैं। मंत्री का तर्क है कि स्थानीय यात्रियों की सुविधा और बेहतर संवाद के लिए यह कदम जरूरी है। हालांकि, इस फैसले का विरोध भी जोर पकड़ रहा है। विपक्ष और विभिन्न संगठनों का कहना है कि इससे गैर-मराठी भाषी चालकों के रोजगार पर असर पड़ेगा और सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है।
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कानून-व्यवस्था का बड़ा मुद्दा
इस बीच, पुलिस उपायुक्त राहुल चव्हाण ने खुलासा किया है कि बिश्नोई गैंग के नाम से आई धमकी कर्नाटक में दी गई थी। आगे की जांच के लिए मामला कर्नाटक पुलिस को सौंपा जाएगा। फिलहाल, सरकार अपने फैसले पर कायम है, जबकि विरोध जारी है। अंडरवर्ल्ड के नाम की एंट्री के बाद यह विवाद अब केवल भाषा या राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून-व्यवस्था का बड़ा मुद्दा बन गया है।
