

Thane Contractors Federation: महाराष्ट्र में सरकारी काम करने वाले ठेकेदारों की करीब 86 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि को लेकर महाराष्ट्र राज्य कंत्राटदार महासंघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ का आरोप है कि पिछले डेढ़ से दो वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के भुगतान अटके हुए हैं। आर्थिक संकट से जूझते हुए 6 ठेकेदारों की आत्महत्या का दावा करते हुए प्रदेशाध्यक्ष मिलिंद भोसले ने सीधे सवाल किया-“इन आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार कौन है?”
ठाणे के शासकीय विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद में महासंघ ने सरकार को कड़ा संदेश दिया। भोसले ने कहा कि सार्वजनिक निर्माण विभाग, ग्राम विकास, जल जीवन मिशन, आदिवासी क्षेत्र समेत करीब पांच-छह विभागों में भारी बकाया है। भुगतान नहीं होने से निर्माण क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि निर्माण व्यवसाय कृषि के बाद रोजगार देने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है, लेकिन लगातार भुगतान रुकने से यह क्षेत्र अब गंभीर संकट में पहुंच गया है।
भोसले के मुताबिक महासंघ ने मुख्यमंत्री सहित संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन दिए हैं। पिछले दो वर्षों में सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले, दिवंगत वित्त मंत्री अजित पवार तथा मुख्यमंत्री की वित्तीय सलाहकार समिति के साथ चर्चा कर एक प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने का दावा भी उन्होंने किया। महासंघ के अनुसार आगामी 15 सितंबर 2026 के आसपास नई भुगतान प्रणाली शुरू होने की संभावना है। हालांकि महासंघ ने स्पष्ट किया कि केवल करीब 6,572 करोड़ रुपये के पायलट प्रोजेक्ट से समस्या का समाधान नहीं होगा। भोसले ने कहा कि ठेकेदारों की कम से कम 50 प्रतिशत बकाया राशि तत्काल मिलनी चाहिए।
मुंबई विभागीय अध्यक्ष मंगेश आवळे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान भी आंदोलन किए गए, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने सरकार से पायलट प्रोजेक्ट को बढ़ाकर 40 से 50 हजार करोड़ रुपये करने और सभी ठेकेदारों को इसमें शामिल करने की मांग की। आवले ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ठेकेदारों की बकाया राशि पर तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो “अब लड़ाई सड़क पर उतरकर लड़नी पड़ेगी।” महासंघ के इस ऐलान से आने वाले दिनों में राज्य में ठेकेदारों का आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।