

Sanjay Raut Targets Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है। इस बार निशाना सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर साधा गया है।
शिवसेना UBT के कद्दावर नेता और सांसद संजय राउत ने एक तरफ मुख्यमंत्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही तारीफों का जिक्र किया, तो दूसरी तरफ नासिक जिले की एक आश्रमशाला का खौफनाक सच साझा कर सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संजय राउत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यों की सराहना की है, जो निश्चित रूप से अच्छी बात है।
लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने एक वीडियो और कुछ आंकड़े साझा करते हुए सरकार को आईना दिखाया। राउत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि फडणवीस जी को अब महाराष्ट्र की उस गरीब जनता की अवस्था भी देखनी चाहिए, जो मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है।
संजय राउत ने नासिक जिले के सुरगाणा तहसील के पलसन में स्थित एक अति-दुर्गम आदिवासी क्षेत्र की माध्यमिक और उच्च माध्यमिक निवासी आश्रमशाला का उदाहरण दिया। इस स्कूल में कुल 440 लड़के और लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन उनकी जीवनशैली किसी सजा से कम नहीं है।
राउत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यहां पढ़ने वाले 440 छात्रों के पास बेड की सुविधा नहीं है और उन्हें मजबूरन जमीन पर ही सोना पड़ता है। स्कूल के बरामदे और पानी की टंकी के पास बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजा यह है कि इन छोटे बच्चों को रात के अंधेरे में ही खुले में अपने कपड़े धोने पड़ते हैं।
बच्चों को मिलने वाले पोषण पर भी सवालिया निशान है। पलसन आश्रमशाला के लिए भोजन 12 किलोमीटर दूर स्थित मानी आश्रमशाला के सेंट्रल किचन से आता है। जब तक यह खाना बच्चों तक पहुंचता है, तब तक वह पूरी तरह ठंडा हो जाता है और उसकी गुणवत्ता भी अत्यंत निम्न दर्जे की होती है।
संजय राउत ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक डरावना खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ से दो महीनों के भीतर इस स्कूल परिसर से शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर 7 से 8 सांप पकड़े हैं। राउत ने याद दिलाया कि हाल ही में गढ़चिरौली में सर्पदंश के कारण तीन लड़कियों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
राउत ने नासिक के पालक मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें केवल शहरों में अपनी चमकोगिरी नहीं करनी चाहिए, बल्कि इन दुर्गम इलाकों की सुध लेनी चाहिए जहां बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे हैं। उन्होंने अंत में एक तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर आदिवासी विकास मंत्रालय का करोड़ों रुपये का फंड जा कहां रहा है?
संजय राउत के इस खुलासे ने महाराष्ट्र सरकार के विकास के दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी फाइलों में चमकने वाला महाराष्ट्र, असल में इन आदिवासी बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है?