

हाईकोर्ट ने कालू बांध परियोजना पर करीब 10 साल पुरानी रोक हटाई।
ठाणे सहित 6 शहरों को जलापूर्ति में मिलेगी राहत।
देरी से परियोजना की लागत ₹657 करोड़ से बढ़कर ₹4,900 करोड़ हुई।
Thane Water Supply Kalu Dam: मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए राहत की खबर है। मुंबई उच्च न्यायालय ने ठाणे व आसपास के इलाके में तेजी से विकसित हो रहे कई शहरों की पानी की किल्लत दूर करने वाली महत्वपूर्ण कालू बांध परियोजना पर पिछले लगभग एक दशक से लगी अंतरिम रोक हटा दी है। अदालत के इस फैसले से परियोजना के निर्माण कार्य के लिए नए सिरे से टेंडर मंगाने का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इस नई टेंडर प्रक्रिया में मूल याचिकाकर्ता 'एफ. ए. एंटरप्राइजेज सहित अन्य सभी इच्छुक पक्ष भी हिस्सा ले सकेंगे। ठाणे जिले के मुरबाड तालुका में कालू बांध परियोजना के पूरा होने से मुंबई महानगर क्षेत्र के ठाणे, कल्याण, डोंबिवली, अंबरनाथ, भिवंडी और बदलापुर शहरों को सुचारु रूप से जलापूर्ति हो सकेगी। पिछले दस वर्षों से काम ठप रहने के कारण ठाणे जिले को अपनी जल आवश्यकताओं के लिए अन्य प्राधिकरणों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इस परियोजना के मूर्त रूप लेने से गर्मियों के दिनों में होने वाली पानी की कटौती से बड़ी राहत मिलेगी और अगले 25 से 30 वर्षों तक बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त पानी का भंडारण सुनिश्चित हो सकेगा। मुंबई उच्च न्यायालय ने 7 दिसंबर 2016 को अंतरिम आदेश दिया था। जिसमें कहा गया था कि संबंधित ठेका किसी अन्य पक्ष को न दिया जाए, यह आदेश लगभग 10 साल तक कायम रहा।
परिणामस्वरूप, बांध के निर्माण का काम ठप पड़ गया। अदालत ने 9 जनवरी 2026 के अपने आदेश में राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि क्या संबंधित परियोजना में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच के दौरान कुछ आपतिजनक बाते पाई गई थी, और इस संबंध में अतिरिक्त हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
इस बीच, इसी याचिकाकर्ता कंपनी की अन्य संबंधित याचिकाओं पर 8 जून 2021 को उच्च न्यायालय ने कोकण सिंचाई विकास महामंडल को उचित प्रक्रिया अपनाकर मूल याचिकाकर्ता या किसी अन्य इच्छुक पक्ष के माध्यम से परियोजना को पूरा करने की छूट दी थी।
महामंडल ने कहा था कि एसीबी की रिपोर्ट में परियोजना के क्रियान्वयन में कोई भ्रष्टाचार, गंभीर अनियमितता या अवैध कृत्य नहीं पाया गया है। वर्ष 2016 में जब अदालत ने इस परियोजना पर रोक लगाई थी, तब इसका अनुमानित खर्च मात्र 657 करोड़ रुपये था।
हालांकि, कानूनी पेचीदगियों और एक दशक की लंबी देरी के कारण अब इस परियोजना का अनुमानित खर्च बढ़कर लगभग 4,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
अदालत द्वारा मूल याचिका का निपटारा किए बिना केवल अंतरिम रोक हटाए जाने से अब कोंकण सिंचाई विकास महामंडल के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब तीव्र गति मिलने की पूरी उम्मीद है।