Bhiwandi Municipal Election: टिकट बंटवारे में परिवारवाद हावी, निष्ठावान कार्यकर्ता नाराज

Maharashtra Local Body Election: भिवंडी मनपा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर परिवारवाद के आरोप तेज हो गए हैं। अपनों को टिकट मिलने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बगावत के सुर उठ रहे हैं।
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भिवंडी मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra Local Body Election: भिवंडी महानगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक दलों पर भाई-भतीजावाद को प्राथमिकता देने के आरोप तेज हो गए हैं।

भाजपा, शिवसेना समेत अन्य दलों ने एक ही परिवार से दो-तीन उम्मीदवारों को टिकट देकर परिवारवाद की स्पष्ट झलक दिखाई है। इससे वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी फैल गई है।

परिवारवाद पर हमला, लेकिन टिकट अपनों को

कांग्रेस को परिवारवाद के मुद्दे पर घेरने वाली भाजपा और शिवसेना अब खुद सवालों के घेरे में आ गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, टिकट बंटवारे में योग्यता और संगठनात्मक योगदान की बजाय परिजनों को प्राथमिकता दी गई। यही कारण है कि कई वार्डों में पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया।

निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से बढ़ी असंतोष की आग

भिवंडी मनपा चुनाव के लिए घोषित उम्मीदवारों की सूची ने पार्टी से जुड़े कई पुराने कार्यकर्ताओं को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि 30 प्रत्याशियों की सूची में भाजपा विधायक महेश चौगुले के बेटे और भाई को टिकट दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं में रोष है।

नए चेहरों को तरजीह, पुराने कार्यकर्ताओं को झटका

भाजपा द्वारा हाल ही में पार्टी में शामिल हुए पूर्व कांग्रेस नेता रितेश गुरुनाथ टावरे को भी एक प्रभाग से उम्मीदवार बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि इस फैसले से कई निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

बागी और निर्दलीयों से बढ़ी मुश्किल

टिकट बंटवारे से नाराज नेता अब बागी उम्मीदवारों और निर्दलीयों को संगठित कर अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भाजपा-शिवसेना के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन सकती है।

उत्तर भारतीय और तेलुगू समाज को नुकसान

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, टिकट वितरण में उत्तर भारतीय और तेलुगू समाज के नेताओं को अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिला है। इससे इन समुदायों में भी असंतोष देखा जा रहा है, जिसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

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