Maharashtra: तेलुगू समाज की नाराजगी, भिवंडी मनपा चुनाव में भाजपा को झटका!
Thane News: भिवंडी मनपा चुनाव से पहले भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष उभर आया है। उत्तर भारतीय और तेलुगू समाज ने संख्याबल के बावजूद उपेक्षा का आरोप लगाया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
भिवंडी मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Bhiwandi News In Hindi: मनपा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। भाजपा शिवसेना की महायुति होने को लेकर अटकलें तेज हैं।
भाजपा से मनपा टिकट की चाह रखने वाले दर्जन भर उत्तर भारतीय सहित तेलुगू समाज के दमदार दावेदारों ने भाजपा विधायक महेश चौगुले को साक्षात्कार देकर समाज के संख्या बल के आधार पर टिकट की दावेदारी पेश की है।
उत्तर भारतीय, तेलुगू समाज के अधिसंख्यक लोगों में से भाजपा किस प्रत्याशी को टिकट देगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। टिकट कटने से तेलुगू समाज में नाराजगी गौरतलब हो कि आगामी भिवंडी मनपा चुनाव में भाजपा विधायक महेश चौगुले द्वारा अखिल पदाशाली तेलुगू समाज के कुछ पूर्व नगरसेवकों के टिकट काटकर अन्य प्रत्याशियों को दिए जाने की चर्चा से तेलुगू समाज में नाराजगी फैली है।
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जानकारों की मानें तो शहर अंतर्गत तमाम मनपा प्रभागों में भारी संख्या में बसे हुए परप्रांतीय तेलुगू समाज की नाराजगी मनपा चुनाव पर विपरीत असर डाल सकती है। भिवंडी शहर स्थित कोंबड पाड़ा, संगम – पाड़ा, कनेरी, नई बस्ती, पद्मा नगर, कामतघर, ओसवाल वाड़ी देवजी नगर, भंडारी कंपाउंड, मानसरोवर, फेना पाड़ा, भाग्य नगर, आशीर्वाद नगर, गणेश नगर, अंजूर फाटा, मानसरोवर आदि मनपा वाड़ों में भारी तादाद में तेलुगू मतदाता रहते हैं।
तेलुगू समाज के कई प्रबुद्ध मतदाताओं ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि, भिवंडी में उत्तर भारतीय समाज, तेलुगू समाज, बिहारी समाज की एकजुटता की बदौलत ही भाजपा विधायक महेश चौगुले तीसरी बार विधानसभा में चुन कर आए हैं।
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आखिर उत्तर भारतीयों की चुनाव में उपेक्षा क्यों
पूर्व सांसद केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल हमेशा सर्व समाज को चुनाव में संख्याबल के आधार पर टिकट देने के हिमायती है। भाजपा से 2017 में कुल 20 नगरसेवक जीते थे। भाजपा से जुड़े कई उत्तर भारतीय कार्यकर्ताओं ने आक्रोशित होकर सवाल किया कि, उत्तर भारतीय समाज हमेशा भाजपा का एकमुश्त वोट बैंक रहा है लेकिन भाजपा नेतृत्व उत्तर भारतीयों को हमेशा टिकट देने में क्यों परहेज करता है ? चुनाव में टिकट मांगे जाने पर सख्या बल नहीं केवल धन, बल और राजनीतिक जोड़तोड़ का आंकड़ा देखा जाता है।
