

Marathi Learning Campaign: मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय विशेष बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस नए नियम और अभियान की रूपरेखा सामने रखी। इस बैठक में परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर समेत राज्य के तमाम बड़े रिक्शा और टैक्सी संगठनों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान मंत्री सरनाईक ने साफ किया कि महाराष्ट्र की आधिकारिक और सांस्कृतिक भाषा मराठी का सम्मान हर उस नागरिक को करना होगा जो यहां रहकर आजीविका कमा रहा है। उन्होंने ऑटो-टैक्सी संगठनों से इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है।
शुरुआती चरण में यह अभियान मुंबई, ठाणे, डोंबिवली, नवी मुंबई, वसई-विरार, पालघर और डहाणू जैसे भारी गैर-मराठी आबादी और चालक बहुल क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। चालकों को काम के साथ-साथ पढ़ाई में आसानी हो, इसके लिए विभिन्न क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) की शाखाओं में ही विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। सरकार इस काम में कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसी प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ले रही है।
अभियान को आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए परिवहन विभाग एक विशेष एआई-आधारित (AI-Powered) मोबाइल एप्लिकेशन पेश करने जा रहा है। यह ऐप विशेष रूप से उन चालकों के लिए डिजाइन किया गया है जो हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषाएं बोलते हैं। ऐप की मदद से चालक सीधे हिंदी वाक्यों का मराठी अनुवाद देख सकेंगे, सही उच्चारण सुन सकेंगे और यात्रियों से किराए, पते या गंतव्य को लेकर किए जाने वाले दैनिक संवाद की मुफ्त प्रैक्टिस कर सकेंगे।
सरकार इस अभियान को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल ट्रेनिंग लेना ही काफी नहीं होगा। प्रशिक्षण की अवधि समाप्त होने के बाद हर एक पंजीकृत चालक की मौखिक परीक्षा ली जाएगी। इस परीक्षा में यह जांचा जाएगा कि चालक यात्रियों से मराठी संवाद कर पा रहा है या नहीं। परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही परिवहन विभाग का आधिकारिक प्रमाणपत्र सौंपेगा, जो भविष्य में उनके परमिट और लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
परिवहन मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि भाषा सीखने और इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए चालकों के पास 15 अगस्त 2026 तक का ही समय है। इसके बाद किसी भी प्रकार की समयवृद्धि या छूट नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल ऑटो और टैक्सी में सफर करने वाले स्थानीय मराठी भाषी यात्रियों और चालकों के बीच होने वाले विवाद कम होंगे, बल्कि राज्य में मराठी भाषा का प्रसार और गौरव भी बड़े पैमाने पर बढ़ेगा।