अंबरनाथ नगर परिषद के अधिकारियों से बात करते प्रदर्शनकारी (फोटो नवभारत)
Shiv Mandir Project Affected People Rehabilitation: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ में स्थित विश्व प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण की योजना अब विवादों के घेरे में आती दिख रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कारण विस्थापित हो रहे 31 भूधारकों के भविष्य को लेकर स्थानीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार की दोपहर अंबरनाथ नगर परिषद (नपा) मुख्यालय में उस समय भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब विभिन्न दलों के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर उप-मुख्याधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
इस आंदोलन का नेतृत्व प्रहार जनशक्ति के जिलाध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल पाटिल, राष्ट्र कल्याण पार्टी के शैलेश तिवारी और शिवसेना (शिंदे गुट) के पोलके ने संयुक्त रूप से किया। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन विकास के नाम पर गरीबों के सिर से छत नहीं छीन सकता। उनकी मुख्य मांग है कि मंदिर विकास परियोजना से प्रभावित होने वाले सभी 31 भूधारकों को पहले आधिकारिक तौर पर ‘पात्र’ घोषित किया जाए। जब तक उनके स्थायी और अस्थायी पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या निष्कासन की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
धरने के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा, जिसे देखते हुए अंबरनाथ नगर परिषद के नगरसेवक प्रधान पाटील ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने आंदोलनकारियों और नपा अधिकारियों के बीच संवाद स्थापित कराया। चर्चा के दौरान नपा के इंजीनियर तडवी ने जानकारी दी कि इस मुद्दे की जटिलता को देखते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) और अंबरनाथ नगर परिषद के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में प्रभावितों के पुनर्वास के लिए कोई ठोस और सर्वमान्य समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
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एडवोकेट स्वप्निल पाटिल और शैलेश तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रशासन केवल मौखिक आश्वासन न दे, बल्कि स्थायी पुनर्वास के संबंध में लिखित गारंटी प्रदान करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना उचित व्यवस्था के भूधारकों के घरों या संपत्तियों पर कार्रवाई की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
प्राचीन शिव मंदिर का कायाकल्प अंबरनाथ के गौरव के लिए आवश्यक है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह विकास किसी की बेदखली की कीमत पर नहीं होना चाहिए। अब सबकी निगाहें प्रशासन और नगरपालिकाओं की आगामी संयुक्त बैठक पर टिकी हैं।