AI और Google सर्च का कमाल! 16 दिन से लापता 70 साल की वृद्धा को ढूंढ निकाला, परिवार से कराया मिलन

AI Reunited Missing Woman: मानसिक बीमारी से जूझ रही 70 वर्षीय महिला भटककर कर्नाटक से महाराष्ट्र पहुंच गई। एआई तकनीक और गूगल सर्च की मदद से 16 दिन बाद उन्हें परिजनों से सुरक्षित मिला दिया गया।
ChatGPT Google Search Police Success
एक परिवार की प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- AI
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Highlights

  • 70 वर्षीय रजाक बी छह अक्टूबर को कर्नाटक से भटककर महाराष्ट्र के नालासोपारा पहुंच गई थीं।

  • महिला मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और याददाश्त कमजोर होने की परेशानी से जूझ रही थीं।

  • अचोले पुलिस ने उन्हें विरार फाटा स्थित समर्थ आश्रम में ठहराया।

  • जीवन आनंद संस्था ने Google Search, ChatGPT और स्थानीय संपर्कों की मदद ली।

ChatGPT Google Search Police Success: मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और याददाश्त चले जाने की समस्या से जूझ रही 70 वर्षीय एक महिला को 'एआई' और 'गूगल सर्च' की मदद से 16 दिन के बाद उनके परिजनों से मिला दिया गया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक के हावेरी जिले में अपने गृहनगर रानेबेन्नूर से रजाक बी (70) गलती से किसी गलत वाहन में बैठ गईं और छह अक्टूबर को पालघर जिले के नालासोपारा पहुंच गई। अधिकारियों का कहना है कि उसके बाद अचोले थाने के पुलिसकर्मियों ने उन्हें विरार फाटा के समर्थ आश्रम में ठहरा दिया।

गूगल सर्च तकनीकों और चैटजीपीटी का इस्तेमाल

जीवन आनंद संस्था (जेएएस) के न्यासी किसान चौरे ने बताया, ''जेएएस के दल ने स्थानीय जानकारी का विश्लेषण करने के लिए गूगल सर्च तकनीकों और चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया, जिसकी मदद से वह रानेबेन्नूर में पुलिस से संपर्क कर पाया।

हमने स्थानीय सामुदायिक नेटवर्कों को भी सक्रिय किया। इसके जरिए हम उनकी बेटियों, दामादों और भतीजों तक पहुंच सके, जो 22 अक्टूबर को उन्हें अपने साथ घर ले गए। इस सफल प्रयास की चर्चा करते हुए चौरे ने कहा, ''प्रौद्योगिकी रास्ता दिखाती है और करूणा परिवारों को साथ लाती है।

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आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का एक बेहतरीन तालमेल

न्यासी किसान चौरे ने आगे बताया कि जब रजाक बी को समर्थ आश्रम लाया गया था, तो वह काफी डरी हुई थीं और अपनी पहचान या परिवार के बारे में कोई पुख्ता जानकारी देने में असमर्थ थीं।

उनकी मानसिक स्थिति और याददाश्त कम होने के कारण पुलिस और आश्रम के लिए उनके घर का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसके बावजूद, टीम ने हार नहीं मानी और उनके द्वारा बताए गए बिखरे हुए शब्दों और स्थानीय लहजे के आधार पर सुराग तलाशने शुरू किए।

इस पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का एक बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। महज कुछ दिनों की कोशिश के बाद, डिजिटल माध्यमों और स्थानीय लोगों के आपसी सहयोग से उस बुजुर्ग महिला का परिवार ढूंढ लिया गया। दीपावली त्योहार से ठीक पहले अपनों से मिलने के बाद इस परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने पुलिस तथा 'जीवन आनंद संस्था' के सभी सदस्यों के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया।

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