चुनाव आयोग पर संजय राउत (सौजन्य- एक्स)
मुंबई: हाल ही में चुनाव आचार संहिता में हुए बदलाव के चलते विपक्ष ने आवाज उठाई है। विपक्ष ने चुनाव आयोग द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा की जानकारी न देने पर सवाल उठाया है। इस दौरान शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
चुनाव आचार संहिता में बदलाव पर बोलते हुए राउत ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है। शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने कहा, “यह लोकतंत्र की हत्या है। जो नियम बनाया गया है, उसके अनुसार हम चुनाव आयोग में जाकर जानकारी नहीं मांग सकते। अब हम चुनाव आयोग से किसी भी तरह की जानकारी नहीं मांग सकते।”
इसे तानाशाही करार देते हुए राउत ने कहा, “यह तानाशाही है। हम क्यों नहीं मांग सकते? अगर आप चाहते हैं कि हम आपसे जानकारी न मांगें, तो सबसे पहले आपको ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर पर चुनाव कराना चाहिए।” उन्होंने चुनाव आयोग पर सीसीटीवी फुटेज और चुनाव दस्तावेज मांगे जाने के बाद नियम बदलने का आरोप लगाया।
#WATCH मुंबई: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा, "ये लोकतंत्र की हत्या है जो नियम बनाया गया है कि हम चुनाव आयोग के पास जानकारी नहीं ले सकते हैं। ये तानाशाही है हम क्यों जानकारी नहीं मांग सकते? अगर आप चाहते हैं कि हम आपसे जानकारी नहीं मांगे तो आप पहले EVM हटा दीजिए और बैलेट पेपर… pic.twitter.com/eobcNWN5ee — ANI_HindiNews (@AHindinews) December 23, 2024
“हम कोई जानकारी नहीं मांगेंगे। आप जनता से क्या छिपाना चाहते हैं? एडवोकेट मोहम्मद ने दस्तावेज मांगने की कोशिश की। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज मांगी। इसके बाद चुनाव आयोग ने नियम बदल दिया। यह कैसी तानाशाही है? देश में लोकतंत्र है। इसलिए हम कहते हैं कि ये लोग डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान के खिलाफ हैं।”
उन्होंने अपने हक की बात बताते हुए कहा, “हमें यह जानने का अधिकार है कि हमारे वोट का क्या हुआ। हमने जो वोट दिया, वह कहां गया?” उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र चुनाव में हुई गड़बड़ी को देखते हुए चुनाव आयोग ने तुरंत अमित शाह और नरेंद्र मोदी के पास सिफारिश की है, जिसके बाद 24 घंटे के अंदर कानून बदल दिए गए। सरकार आगे बहुत से घोटाले करने वाली है और ये उसकी तैयारी कर रही है।
महाराष्ट्र की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
आपको बताते चले ये बदलाव महमूद प्राचा बनाम ईसीआई मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश के मद्देनजर आए हैं, जहां अदालत ने चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93(2) के तहत सीसीटीवी फुटेज सहित हरियाणा विधानसभा चुनाव से संबंधित सभी दस्तावेजों को साझा करने का आदेश दिया था। बताया गया कि ये चुनाव दस्तावेजों तक सीमित है इसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल नहीं है।