विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर की मूर्तियों पर वज्रलेपन पर रोक, पंढरपुर अदालत का बड़ा फैसला
Vajralepan Stay Order: पंढरपुर की दीवानी अदालत ने श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर की मूर्तियों पर प्रस्तावित रासायनिक वज्रलेपन को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। याचिका पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया।
- Written By: अपूर्वा नायक
श्री विठ्ठल रुक्मिणी भगवान (सौ. सोशल मीडिया )
Vajralepan Stay Order News: पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर की मूर्तियों पर 23 और 24 जून को प्रस्तावित रासायनिक वज्रलेपन (संरक्षण लेपन) को पंढरपुर की दीवानी अदालत (कनिष्ठ स्तर) ने तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।
वारकरी संप्रदाय और मंदिर महासंघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अगले आदेश तक मूर्तियों पर किसी भी प्रकार का लेपन करने से मना किया है। यह कार्य मंदिर समिति और पुरातत्व विभाग की ओर से किया जाना प्रस्तावित था।
अदालत ने लगाई व्रजलेपन पर रोक
वारकरी संप्रदाय के प्रतिनिधियों, बालकृष्ण डिंगरे तथा मंदिर महासंघ के पुरुषोत्तम लंके ने दीवानी न्यायाधीश श्रीमती सोनाली राऊळ की अदालत में यह वाद दायर किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुधीर रानडे ने विस्तृत और प्रभावी पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मंदिर समिति को वज्रलेपन न करने के संबंध में सख्त निर्देश दिए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
भंडारा ST Bus में रियायती सफर के लिए 1 अगस्त से NCMC स्मार्ट कार्ड अनिवार्य, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
नवभारत संपादकीय: मानसून नहीं आया, लेकिन सियासी मानसून शुरू; सदन में उठेंगे बड़े सवाल
चंद्रपुर में मानसून की पहली जोरदार बारिश से तबाही; जलभराव के कारण मनपा के दावों की खुली पोल, बिजली-इंटरनेट ठप
मराठवाड़ा में पानी का संकट भयावह, बीड के अधिकांश जलाशय खाली; प्रशासन ने पानी चोरी पर दी एफआईआर की चेतावनी
अदालत के फैसले के आधार
हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार मंदिर की मूर्ति केवल पत्थर या शिल्पकला का नमूना नहीं होती, बल्कि उसमे साक्षात देवत्व (प्राण प्रतिष्ठा) विद्यमान होता है। काकड आरती से लेकर नैवेद्य तक सभी धार्मिक अनुष्ठान इसी श्रद्धा और भावना पर आधारित है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मंदिर समिति मूर्ति को मात्र पत्थर की प्रतिमा मानकर कृत्रिम और अपवित्र रासायनिक पदार्थों का उपयोग करना चाहती है, जिससे मूर्ति का देवत्व प्रभावित या नष्ट हो सकता है। अब तक चार बार वज्रलेपन किए जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं।
ये भी पढ़ें :- मराठवाड़ा में पानी का संकट भयावह, बीड के अधिकांश जलाशय खाली; प्रशासन ने पानी चोरी पर दी एफआईआर की चेतावनी
श्रद्धालुओं की नजरें अगले फैसले पर
इस फैसले के बाद वारकरी संप्रदाय और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज हो गई है। मंदिर प्रशासन, पुरातत्व विशेषज्ञों और धार्मिक संगठनों के बीच अब इस विषय पर आगे की प्रक्रिया को लेकर मंथन होने की संभावना है। फिलहाल सभी की निगाहें अदालत की अगली सुनवाई और अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं, जो इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे की दिशा तय करेगा।
