रोहित पवार के समर्थन में उरते सांसद धैर्यशील मोहितेपाटिल, कहा- शक्तिपीठ महामार्ग के खिलाफ शुरू करेंगे आंदोलन

Dhairyasheel Mohite-Patil: बेमौसम बारिश और फसलों के गिरते दामों से परेशान किसानों के समर्थन में सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटिल उतर आए हैं। उन्होंने विधान परिषद चुनाव के बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
Dhairyasheel Mohite Patil Supports Rohit Pawar Protest
सांसद धैर्यशील मोहिते पाटिल व रोहित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Dhairyasheel Mohite Patil Support Rohit Pawar Protest: दुनिया भर में गहराते युद्ध के बादल, बेमौसम बरसात और कृषि उत्पादों की लगातार गिरती कीमतों ने अन्नदाताओं को चौतरफा संकट में धकेल दिया है। इस नाजुक मोड़ पर माढा लोकसभा क्षेत्र के सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटिल ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार के किसान आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि विधान परिषद चुनाव समाप्त होते ही शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना के विरोध में किसानों के अधिकारों के लिए तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सांसद मोहिते-पाटिल ने कहा कि माढा क्षेत्र में सीना नदी में आई बाढ़ के कारण कई गांव जलमग्न हो गए थे, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावित किसानों को बेहद मामूली सहायता दी गई, जो किसानों के साथ मजाक के समान है। उन्होंने मांग की कि बाढ़ग्रस्त किसानों को उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

किसान कर रहे संकट का सामना

सांसद धैर्यशील पाटिल ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर बोलते हुए मोहिते-पाटिल ने कहा कि दूध, केला और प्याज उत्पादक किसान वर्तमान में उचित दाम न मिलने के कारण भारी संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन कृषि उत्पादों को उचित मूल्य दिलाने के लिए सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पहले ही संसद में आवाज उठाई गई है और केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया है।

बता दें कि राेहित पवार किसानों की मांगों को लेकर सोलापुर जिले के पंढरपुर में अन्न त्याग आंदोलन कर रहे हैं। सांसद धैर्यशील मोहित पाटिल ने इसी आंदोलन को लेकर रोहित पवार का समर्थन  किया है।

किसानों के कहने के अनुसार ही काम करूंगा

धैर्यशील मोहिते-पाटील ने कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना के कारण किसानों की उपजाऊ जमीन खतरे में पड़ रही है। इसलिए विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही वे स्वयं इस मुद्दे पर आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इस संघर्ष में मेरे साथ कोई आए या न आए, मैं अकेला भी रहूं तो किसानों के हितों के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ूंगा। किसान जैसा कहेंगे, वैसा ही काम करूंगा और उनके हितों की रक्षा के लिए हमेशा खड़ा रहूंगा। उन्होंने विश्वास जताया कि किसानों के अधिकारों और उनकी जमीन बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखा जाएगा।

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