

Maratha Reservation Warning To Fadnavis Kunbi Certificate: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। 29 अगस्त से शुरू होने वाले निर्णायक राज्यव्यापी आंदोलन से पहले मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल सांगली पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कड़े शब्दों में चेतावनी दी।
मनोज जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया कि मराठा समुदाय को कानूनी आरक्षण से वंचित रखने के लिए जानबूझकर साजिश के तहत कुनबी (Kunbi) जाति प्रमाण पत्रों को रद्द किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने मंत्रियों की गलतियों को स्वीकार करे और रद्द किए गए कुनबी रिकॉर्ड्स के आदेशों को तुरंत वापस ले, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
सांगली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बावनकुले के पत्र में अधिकारियों को सांकेतिक भाषा के जरिए कुनबी पंजीकरण रद्द करने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
जरांगे ने कहा, "पत्र में 'A' लिखे होने का मतलब ही यही है कि इस मांग को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर कार्रवाई की जाए। अगर सरकार का जाति सत्यापन समिति के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं है, तो मंत्री ने इतनी जल्दबाजी में प्रस्ताव क्यों मांगा? यह मराठा समाज के साथ किया जा रहा सीधा अन्याय और धोखा है।"
प्रशासन द्वारा कुनबी दस्तावेजों में लिखावट और स्याही के अंतर का बहाना बनाए जाने पर जरांगे पाटिल ने तीखा आक्रोश जताया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या एक ही गांव में कोई तलाठी 50-50 साल तक रहता है? हर साल तलाठी बदलता है, तो दस्तावेजों में इस्तेमाल की जाने वाली स्याही और लिखावट बदलना स्वाभाविक है। लिखावट या पुरानी लिखावट का बहाना बनाकर मराठा समुदाय के प्रामाणिक रिकॉर्ड्स को अमान्य ठहराना बावनकुले परिवार की नासमझी और मराठा विरोधी रवैये को दर्शाता है।"
राज्यभर में अपनी जनसंपर्क यात्रा के तहत मराठों को एकजुट कर रहे जरांगे पाटिल ने कहा कि मराठा समाज के लिए यह अस्तित्व और जीवन-मरण का सवाल है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधी अपील करते हुए कहा, "अभी भी समय बीता नहीं है, सरकार अपनी गलती सुधारे और मराठा समाज के साथ हो रहे अन्याय को रोके। यदि सरकार ने अपना अड़ियल रवैया नहीं बदला, तो 29 अगस्त से शुरू होने वाला आंदोलन अभूतपूर्व और उग्र होगा, जिसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।"