

रत्नागिरी के खेड में मंत्री योगेश कदम का PA बनकर ₹5,000 लेने का आरोप।
अवैध पत्थर खदानों का मुद्दा मंत्री तक पहुंचाने के लिए मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था।
दिल्ली में भी फर्जी राजनीतिक पहचान के जरिए ₹1.69 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया।
Fake Minister PA Fraud Khed Police Case: महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड में खुद को राज्य के मंत्री योगेश कदम का निजी सहायक (PA) बताकर एक समाजसेवी से 5,000 रुपये ठगने का मामला सामने आया है।
शिकायतकर्ता विद्याधर दत्ताराम सालुंखे (56) का आरोप है कि रवीराज चिखले ने मंत्री से मुलाकात कराने और उनका काम करवाने का भरोसा देकर उनसे पैसे लिए।
शिकायत के आधार पर खेड पुलिस ने 18 अक्टूबर को मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत के अनुसार, सालुंखे चिपलूण तालुका में कथित तौर पर चल रही अवैध पत्थर खदानों का मुद्दा मंत्री के सामने उठाना चाहते थे। उनका आरोप था कि इन खदानों के कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
इसी दौरान रवीराज चिखले ने कथित तौर पर खुद को मंत्री योगेश कदम का निजी सहायक बताया और मंत्री से मुलाकात कराने के साथ काम करवाने का भरोसा दिया। आरोप है कि 17 सितंबर को सालुंखे से 5,000 रुपये लिए गए, लेकिन न तो उनकी मुलाकात कराई गई और न ही संबंधित काम हुआ।
शिकायत के आधार पर खेड पुलिस ने 18 अक्टूबर को अपराध क्रमांक 342/2026 के तहत केस दर्ज किया। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 318(2), 318(4) और 319(2) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी पर लगे आरोपों को साबित हुआ नहीं माना जा सकता।
इसी तरह की एक अन्य घटना में दिल्ली पुलिस ने 29 सितंबर को 44 वर्षीय भालिंदर पाल सिंह को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने खुद को एक प्रमुख राजनीतिक नेता का जीवनसाथी बताकर द्वारका के एक व्यवसायी से 1.69 लाख रुपये की ठगी की।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने मैसेजिंग ऐप की प्रोफाइल तस्वीर में अशोक चिह्न लगाया था, ताकि उसका अकाउंट आधिकारिक लगे। आरोप है कि उसने व्यवसायी से एक छात्र की फीस जमा करने के लिए तत्काल पैसे मांगे और बाद में नेता के कार्यालय से रकम वापस मिलने का भरोसा दिलाया।
व्यवसायी ने उसके कहने पर कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए और दिल्ली से लखनऊ की हवाई टिकट भी बुक कर दी। बाद में उसे ठगी का एहसास हुआ। दोनों मामलों में फर्जी पहचान और प्रभावशाली लोगों से संपर्क का भरोसा देकर पैसे लेने के आरोप सामने आए हैं।