अनिकेत तटकरे की राह का सबसे बडा रोड़ा गायब; MLC चुनाव से पहले नितेश राणे के दांव से MVA पस्त

Konkan MLC Election: कोंकण विधान परिषद चुनाव 2026 में बड़ा उलटफेर! उद्धव गुट के उम्मीदवार ने नितेश राणे की मौजूदगी में नामांकन वापस लिया। महायुति के अनिकेत तटकरे की निर्विरोध जीत तय।
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सांकेतिक फोटो (सोर्सः एआई फोटो)
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Aniket Tatkare Unopposed: कोंकण विधान परिषद चुनाव 2026 के दौरान महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा नाटकीय उलटफेर देखने को मिला है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार सुरेंद्र उर्फ बाल माने ने नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन अचानक अपना पर्चा वापस ले लिया, जिससे महायुति के उमीदवार अनिकत तटकरे लिए जीत का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

अचानक नामांकन वापसी

रायगड-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से ठाकरे गुट के उम्मीदवार बाल माने ने ऐन वक्त पर अपना नाम वापस ले लिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वे भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे के साथ रत्नागिरी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी उम्मीदवारी वापस ली। इसे नितेश राणे द्वारा उद्धव ठाकरे को दिए गए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

निर्विरोध चुनाव का मार्ग प्रशस्त

कोंकण विधान परिषद के रण में दो ही उमीदवार देखें जा रहें थे, जिनमे से MVA के बाल माने के चुनावी मैदान से हटने के बाद अब कोंकण विधान परिषद की यह सीट निर्विरोध चुनी जाएगी। महायुति गठबंधन की ओर से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अजित पवार गुट ने अनिकेत तटकरे को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनकी जीत अब तय मानी जा रही है।

कौन है बाल माने?

बाल माने मूल रूप से भाजपा में थे, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनावों के समय उन्होंने ठाकरे गुट में प्रवेश किया था। उन्होंने उदय सामंत के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, परंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब चुनाव के अंतिम समय में अपने पुराने घर वापस लौटे बाल माने के इस कदम ने महाविकास अघाड़ी को संकट में डाल दिया है।

कोंकण क्षेत्र का संख्या बल

कोंकण निर्वाचन क्षेत्र में कुल 831 मतदाता हैं। आंकड़ों के लिहाज से महायुति पहले से ही बहुत मजबूत स्थिति में थी। वहां शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 236, भाजपा के पास 151 और राष्ट्रवादी (अजित पवार) के पास 63 वोट थे। वहीं, महाविकास अघाड़ी की स्थिति काफी कमजोर थी, जहाँ ठाकरे गुट के पास 55 और कांग्रेस के पास केवल 50 वोट थे। इस घटना ने कोंकण में उद्धव ठाकरे की रणनीति को विफल कर दिया है और महायुति ने अपनी कुशल घेराबंदी से इस सीट को बिना चुनाव लड़े ही अपने नाम कर लिया है।

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