Vidhan Parishad Election: चुनाव से पहले ही शिवसेना की जीत! NCP उम्मीदवार के हटने से रविंद्र फाटक का रास्ता साफ

Vidhan Parishad Election से पहले ठाणे-पालघर सीट पर शिंदेसेना के रविंद्र फाटक निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। NCP के अभिजीत पवार द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद फाटक की जीत का रास्ता साफ हुआ है।
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सांकेतिक फोटो (सोर्सः एआई फोटो)
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Thane-Palghar MLC Election: महाराष्ट्र विधानपरिषद में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की 17 सीटों के लिए आगामी 18 जून को होने वाले Vidhan Parishad Election के पहले ही शिवसेना का खाता खुल गया है। विधानपरिषद की ठाणे-पालघर स्थानीय निकाय सीट पर शिवसेना के रविंद्र फाटक का निर्विरोध चयन हो गया है। गुरुवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन महाविकास आघाड़ी की तरफ से एनसीपी एसपी के उम्मीदवार अभिजीत पवार ने अप्रत्याशित रूप से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इस तरह इस चुनाव में बचे एकमात्र उम्मीदवार रविंद्र फाटक का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है।

फाटक लगातार दूसरी बार MLC

रविंद्र फाटक ठाणे-पालघर स्थानीय निकाय सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बनने जा रहे हैं। 2016 में उन्होंने एनसीपी के नेता रहे वसंत डावखरे को हरा कर विधानपरिषद की यह सीट जीती थी। इस बार बदले हुए समीकरण में महायुती उम्मीदवार के रूप में उनका जीतना तय माना जा रहा था। लेकिन चुनाव होने के पहले ही एनसीपी उम्मीदवार मैदान से हट गए और रविंद्र फाटक का दूसरी बार विधानपरिषद में पहुंचने का रास्ता साफ हो गया।

बीजेपी ने भी किया था दावा

उल्लेखनीय है कि ठाणे-पालघर विधानपरिषद की इस सीट पर पहले बीजेपी ने भी दावा किया था। ठाणे-पालघर के स्थानीय निकायों में शिवसेना की बजाय बीजेपी सदस्यों की संख्या ज्यादा होने से इस सीट को लेकर महायुती में रस्साकशी चल रही थी,परंतु डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के प्रभाव वाला ठाणे जिला होने के नाते यह सीट शिवसेना को मिली और शिवसेना के उम्मीदवार फाटक निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता भी खुल गया। अब 18 जून को राज्य की 16 सीटों के लिए ही चुनाव होगा। इनमें 11 पर बीजेपी, 3 पर शिवसेना एवं 2 सीटो पर अजित पवार की एनसीपी के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

परिवहन मंत्री सरनाईक की अपील का असर

गौरतलब है कि ठाणे-पालघर विधानपरिषद का चुनाव निर्विरोध कराने की अपील राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने की थी। जिसका असर दिखा। सरनाईक ने कहा कि चुनाव निर्विरोध हो यही लोकतंत्र और राजनीतिक संस्कृति की अपेक्षा थी। परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा कि इसके पहले भी पर्याप्त संख्याबल न होने पर शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने वसंत डावखरे के खिलाफ उम्मीदवार ही नहीं उतारा था। इस बार एनसीपी ने भी हमारी अपील पर सद्भावना दिखाते हुए अपने उम्मीदवार का नामांकन वापस ले लिया। यह कदम स्वागत योग्य है।

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