यवतमाल जिले के पुसद वन विभाग पर करोड़ों के दुरुपयोग का आरोप, शिकायत पहुंची नागपुर; उच्चस्तरीय जांच की मांग
Yavatmal Railway Project: पुसद वन क्षेत्र में रेलवे परियोजना के लिए पेड़ कटाई मुआवजे की 5 करोड़ राशि के उपयोग पर सवाल उठे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ने उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।
- Written By: अंकिता पटेल
यवतमाल खबर, पुसद वन विभाग, रेलवे परियोजना, (सोर्स: सौजन्य AI)
Yavatmal News Pusad Forest Department: यवतमाल जिले के पुसद तहसील के बहुप्रतीक्षित वर्धा-यवतमाल-नांदड़ रेलमार्ग परियोजना के तहत पुसद वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के बदले रेलवे विभाग द्वारा वन विभाग को 5 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी गई थी। आरोप है कि इस राशि का पुसद वन विभाग के अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से उपयोग किया गया।
इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता गजानन वानखेड़े ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य वन सचिव मिलिंद म्हैसकर को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि पुसद के उपवनसंरक्षक (प्रादेशिक) द्वारा पेड़ों के प्रत्यारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये के प्रस्ताव तैयार किए गए। इन प्रस्तावों को बिना किसी तकनीकी जांच के यवतमाल के वनसंरक्षक से अगले ही दिन अनुशंसा दिलाकर नागपुर स्थित अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (अर्थसंकल्प एवं विकास) कार्यालय में प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेजा गया।
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पेड़ प्रत्यारोपण में लाखों के खर्च पर घोटाले के आरोप
नागपुर कार्यालय ने उक्त प्रस्तावों को प्रशासनिक मंजूरी नहीं दी और दस्तावेज वापस लौटा दिए गए, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर राशि खर्च दर्शाए जाने का आरोप लगाया गया है। वानखेड़े के अनुसार, पुसद वन परिक्षेत्र के बेलगव्हाण नियत क्षेत्र में 107 पेड़ों के प्रत्यारोपण पर 79 लाख 21 हजार 240 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं।
यानी प्रति पेड़ लगभग 74 हजार रुपये खर्च दिखाया गया, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वास्तविकता में केवल 10 से 20 पेड़ों को जेसीबी मशीन से स्थानांतरित किया गया, जबकि कई प्राकृतिक पेड़ों की केवल छंटाई कर उनके आसपास पानी देने का काम दिखाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी राशि विभिन्न समितियों के माध्यम से “सुविधाजनक तरीके” से खर्च दर्शाकर निकाल ली गई।
वन विभाग पर अनियमितता के आरोप, जांच का आश्वासन
मामले से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगे जाने पर भी विभागीय कार्यालयों द्वारा जानकारी देने में टालमटोल की जा रही है। वानखेडे ने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग से प्राप्त 5 करोड़ रुपये की राशि का गलत उपयोग कर शासन को गुमराह किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
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इस मामले में स्थानीय वन अधिकारियों से संपर्क करने पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। तो वन मंत्री गणेश नाईक से संपर्क करने पर उन्होंने जांच का भरोसा दिया है। मामले में भारी अनियमितता की शिकायतों को देखते हुए उन्होंने जांच के बाद उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
शिलोणा और दिग्रस क्षेत्र में भी करोड़ों खर्च का दावा
- शिकायत के अनुसार, शेबालपिपरी वनपरिक्षेत्र के शिलीणा वृत्त अंतर्गत नागवाड़ी नियत क्षेत्र में 145 पेड़ों के प्रत्यारोपण पर 99 लाख 303 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं।
- यानी प्रति पेड करीब 68 हजार 278 रुपये खर्च बताया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि इतना खर्च दिखाने के बावजूद एक भी पेड़ जीवित नहीं है।
- इसी प्रकार शेष 3 करोड़ 21 लाख 78 हजार 457 रुपये दिग्रस वनपरिक्षेत्र के रोहणा एवं अन्य नियत क्षेत्रों में खर्च दिखाए गए है, जबकि आरोप है कि जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं किया गया।
