

Pune Water Crisis Khadakwasla Dam: पुणे शहर में गहराते जल संकट और खड़कवासला डैम श्रृंखला में पानी के तेजी से घटते स्तर को देखते हुए पुणे महानगरपालिका द्वारा एक दिन छोड़कर जलापूर्ति करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन के इस फैसले ने शहरवासियों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। पानी की कटौती लागू होने के महज तीन दिनों के भीतर ही महानगरपालिका के शिकायत निवारण केंद्र पर 500 से अधिक शिकायतें आई हैं।
नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई इन शिकायतों में मुख्य रूप से नलों में बेहद कम दबाव (लो प्रेशर) से पानी आना, जलापूर्ति के निर्धारित समय में देरी होना, घोषित दिन पर भी पानी उपलब्ध न होना और तय समय से पहले ही पानी की सप्लाई बंद कर दिए जाने जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हैं।
मजबूरी में पानी कटौती का निर्णय शहर के विभिन्न हिस्सों से आ रही इन शिकायतों पर महापौर मंजुषा नागपुरे ने कहा कि डैमों में उपलब्ध सीमित जल संग्रह को आगामी मानसून या लंबे समय तक बनाए रखने के लिए मनपा को मजबूरी में पानी कटौती का यह कड़ा निर्णय लेना पड़ा है। उन्होंने माना कि कई रिहायशी इलाकों से कम दबाव से पानी मिलने की निरंतर शिकायतें मिल रही हैं।
मनपा के जलापूर्ति विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शहर में आधिकारिक रूप से पानी कटौती लागू होने से पहले तक विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिदिन औसतन 1,450 टैंकर फेरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही थी। लेकिन अब संकट बढ़ने और नलों में पानी न आने के कारण टैंकरों की मांग में भारी वृद्धि हुई है। प्रशासन ने दावा किया है कि कोथरुड, बानेर और बालेवाड़ी जैसे वीआईपी और घने इलाकों से प्राप्त कई शिकायतों का निवारण त्वरित रूप से कर दिया गया है। इसके बावजूद हडपसर, कालेपड़ल, शांतिनगर, मोहम्मदवाड़ी, सैयदनगर, केशवनगर और खराड़ी के कई रिहायशी हिस्सों में पानी का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है।
एक दिन छोड़कर जलापूर्ति शुरू करने के सरकारी फैसले के खिलाफ घोरपड़ी के भीमनगर क्षेत्र में जन आक्रोश फूट पड़ा है। शुक्रवार को स्थानीय महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर 'रास्ता रोको' आंदोलन किया। इस दौरान महिलाओं ने खाली बाल्टियों और बर्तनों के साथ प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
महापौर मंजुषा नागपुरे ने बताया कि शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली खड़कवासला डैम श्रृंखला में इस वर्ष केवल 4 टीएमसी जल संग्रह शेष है। इसलिए पानी कटौती का निर्णय लेना पड़ा है। कम दबाव से पानी मिलने की शिकायतों को दूर करने के लिए प्रशासन लगातार काम कर रहा है। 15 दिनों के बाद स्थिति की समीक्षा कर आगे की जल प्रबंधन और बचत संबंधी रणनीति तय की जाएगी।