वैष्णवी हगवणे केस में बॉम्बे HC का बड़ा फैसला, सास-देवर समेत 3 को बेल; बोला- जमानत का मतलब बरी होना नहीं

Vaishnavi Hagawane Case: वैष्णवी हगवणे मौत मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सास लता, देवर सुशील और नीलेश चव्हाण को सशर्त जमानत दी। जानें कोर्ट की शर्तें और पूरा मामला।
Vaishnavi Death Case Bombay High Court
वैष्णवी हगवणे, पति और सास(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में शामिल तीन आरोपियों को सशर्त जमानत दी है।

  • अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ निर्दोष साबित होना नहीं है।

  • आरोपियों को हर महीने पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

Vaishnavi Hagawane Death Case Bombay High Court Bail: महाराष्ट्र के चर्चित वैष्णवी हगवणे मौत मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है। जमानत पाने वालों में वैष्णवी की सास लता हगवणे, देवर सुशील हगवणे और पारिवारिक मित्र नीलेश चव्हाण शामिल हैं।

न्यायमूर्ति मिलिंद एन. जाधव ने 5 नवंबर को तीनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने साफ किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपियों का निर्दोष साबित होना नहीं है। मामले का मुख्य मुकदमा पहले की तरह जारी रहेगा।

किस आधार पर मिली तीनों आरोपियों को जमानत?

अदालत ने तीनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका, जांच की स्थिति और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल उपलब्ध सामग्री से ऐसे विशिष्ट कृत्यों की पर्याप्त पुष्टि नहीं होती, जिन्हें सीधे तौर पर वैष्णवी को आत्महत्या के लिए उकसाने से जोड़ा जा सके। हालांकि, ये टिप्पणियां केवल जमानत याचिकाओं पर विचार करने तक सीमित हैं। इनका मुख्य मुकदमे की सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

तीनों आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर जमानत दी गई है। इसके अलावा इतनी ही राशि के एक या दो जमानतदार पेश करने होंगे। जमानतदारों की व्यवस्था के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। तब तक प्रत्येक आरोपी 25 हजार रुपये के अस्थायी नकद जमानत प्रावधान का लाभ ले सकता है।

हर महीने पुलिस स्टेशन में लगानी होगी हाजिरी

मुंबई हाई कोर्ट ने जमानत देते समय कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं। तीनों आरोपियों को अगले छह महीने तक प्रत्येक महीने के पहले रविवार को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच बावधन पुलिस स्टेशन में जांच अधिकारी के सामने हाजिरी लगानी होगी। उन्हें जांच अधिकारी को अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा।

इसके अलावा आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकेंगे और न ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकेंगे। अदालत की अनुमति के बिना महाराष्ट्र से बाहर जाने पर भी रोक रहेगी। उन्हें मुकदमे की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना होगा और अनावश्यक रूप से तारीख नहीं मांगनी होगी। इन शर्तों का उल्लंघन होने पर अभियोजन पक्ष उनकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।

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तीन सप्ताह की रोक लगाने की मांग खारिज

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने जमानत आदेश के क्रियान्वयन पर तीन सप्ताह की रोक लगाने की मांग की थी, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दे सकें। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत को आरोपियों की निर्दोष मुक्ति नहीं समझा जाना चाहिए। उनके खिलाफ चलने वाला मुख्य मुकदमा और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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क्या है वैष्णवी हगवणे मौत मामला?

वैष्णवी हगवणे की शादी 28 अप्रैल 2023 को हुई थी। 16 मई 2025 को पुणे जिले के भुकूम स्थित ससुराल में उनका शव फंदे से लटका मिला था। इसके बाद उनके पिता अनिल कस्पटे ने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति शशांक, सास लता, ननद करिश्मा, ससुर राजेंद्र, देवर सुशील और पारिवारिक मित्र नीलेश चव्हाण समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

इस मामले ने महाराष्ट्र में व्यापक चर्चा पैदा की थी। फरवरी 2026 में सत्र न्यायालय ने छह मुख्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब बॉम्बे हाई कोर्ट से तीन आरोपियों को जमानत मिलने के बावजूद मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी। वहीं, वैष्णवी के पति शशांक, ससुर राजेंद्र और ननद करिश्मा को इस आदेश से जमानत नहीं मिली है।