3 लाख देकर बन रहे थे ग्रेजुएट! पुणे यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री रैकेट, कर्मचारी पर गंभीर आरोप

Pune University News: पुणे विश्वविद्यालय के कर्मचारी पर 3 लाख रुपये में फर्जी बीकॉम डिग्री देने का आरोप। रिक्शा चालक की सतर्कता से खुलासा, वीसी ने जांच के लिए समिति बनाई।
A fake degree racket exposed at Savitribai Phule Pune University as an employee allegedly offers BCom degree for ₹3 lakh; high-level inquiry setup.
सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Savitribai Phule Pune University Fake Degree Racket: सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, जिसे 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' के नाम से भी जाना जाता है, की साख पर फर्जी डिग्री रैकेट के आरोपों से सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी पर लाखों रुपये लेकर कथित तौर पर फर्जी डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले का खुलासा एक जागरूक रिक्शा चालक की सतर्कता से हुआ।

शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और मामले की सत्यता की पड़ताल के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। मामला तब सामने आया, जब शिकायतकर्ता महेश कदम अपने बेटे की उच्च शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी लेने के लिए विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। कदम के अनुसार, विश्वविद्यालय के वित्त एवं लेखा विभाग में कार्यरत कर्मचारी रमेश मुकेकर और उसके कुछ सहयोगियों ने उनसे संपर्क किया। इन लोगों ने बिना परीक्षा दिए तीन लाख रुपये में बी।कॉम। की मूल डिग्री उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा।

कुलपति से की शिकायत

महेश कदम ने तुरंत इसकी लिखित शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश गोसावी से की और संबंधित कर्मचारी सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्था के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी डिग्री बेचने का मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह मेहनत से पढ़ाई करने वाले लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

दोषियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी

शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। परीक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि एक कर्मचारी के खिलाफ फर्जी अंकपत्र और डिग्री तैयार करने से जुड़ी शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की सत्यता और इसके विस्तार की जांच के लिए समिति बनाई गई है। जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

छात्र संगठन का आक्रोश बढ़ा इस खुलासे के बाद छात्र संगठनों में भी नाराजगी है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐतिहासिक संस्था में फर्जी डिग्री का मामला बेहद गंभीर है। रिश्वत लेकर प्रमाणपत्र बोटने की किसी भी कोशिश से शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास को नुकसान पहुंचता है। दोषियों की पहचान कर तत्काल बर्खास्तगी और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

पहले भी हुआ फर्जीवाड़ा

2017 में परीक्षा प्रणाली में बाहरी हस्तक्षेप और अंक बदलने वाले रैकेट का खुलासा हुआ था। 2019 में संबद्ध कॉलेजों के नाम पर फर्जी डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट की शिकायतें आई थी। कोरोना काल में फर्जी हॉल टिकट, मार्कशीट और परिणाम पत्रक के मामले भी सामने आए थे। 2023 में विदेश जाने और नौकरी के लिए दस्तावेज सत्यापन के दौरान फर्जी डिग्रियों के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी।

भरोसा जीतने आरोपियों ने दिखाए कई फर्जी डिग्री

शिकायतकर्ता का कहना है कि भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर उन्हें तुरंत एक बी. कॉम. डिग्री प्रमाणपत्र भी दिखाया गया। हालांकि, प्रमाणपत्र को ध्यान से देखने पर उसमें कई गड़बड़ियां नजर आईं। प्रमाणपत्र पर विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के बजाय पुराना नाम 'यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे' अंकित था। इसके बाद जब उन्हें अलग-अलग वर्षों के अन्य प्रमाणपत्र दिखाए गए, तो उन्हें संदेह हुआ कि यह किसी बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा हो सकता है।

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