

Tukaram Mundhe FDA Commissioner Action: अपनी कड़क कार्यशैली और अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे जहां भी जाते हैं, वहां नियमों का राज होता है। अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त का पदभार संभालते ही मुंढे ने अपनी चिर-परिचित सिंघम स्टाइल में मिलावटखोरों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। मंगलवार, 26 मई को पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने पहले ही दिन से राज्य के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर घटिया माल बेचने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
मुंढे के आदेश पर एफडीए की टीमों ने पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और धाराशिव में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है:
इस पूरे मामले में अब तक 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अपनी पहचान के अनुरूप सख्त रुख अपनाते हुए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और हानिकारक रसायनों का उपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को शुद्ध और रसायन मुक्त भोजन मिलना उनका अधिकार है और यह मुहिम आगे भी इसी रफ्तार से जारी रहेगी। मुंढे की इस कार्रवाई से जहां घटिया माल बेचने वाले व्यापारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं, वहीं आम जनता प्रशासन के इस त्वरित और सख्त कदम की जमकर सराहना कर रही है।
गौरतलब है कि तुकाराम मुंढे का एफडीए आयुक्त के रूप में यह 25वां तबादला है। अपनी बेदाग छवि और सख्त अनुशासन के लिए मशहूर मुंढे ने हमेशा नियमों को सर्वोपरि रखा है। चाहे सामने कोई रसूखदार अमीर हो, प्रभावशाली राजनेता हो या किसी सत्ताधारी दल का करीबी, मुंढे ने कभी किसी के दबाव में आकर नियमों से समझौता नहीं किया। व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उनके इसी अडिग रवैये के कारण उन्हें अपने करियर में बार-बार तबादलों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, बार-बार होने वाले इन तबादलों ने उनकी साख को और मजबूत ही किया है, क्योंकि आम जनता उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में देखती है जो हर नई जिम्मेदारी में व्यवस्था को सुधारने के लिए पूरी ताकत झोंक देता है।