तुकाराम मुंढे का फिर हुआ तबादला, ट्रांसफर की सिल्वर जुबली; जानें अब तक हुए तबादलों का पूरा सफर

Honest IAS Officer: IAS तुकाराम मुंढे ने संभाला FDA आयुक्त का पद। 20 साल के करियर में यह उनका 25वां तबादला है। जानें उनके अब तक के 25 तबादलों की पूरी लिस्ट और दिव्यांग विभाग से हुई विदाई की असली वजह।
Tukaram Mundhe transferred again, marking his silver jubilee; learn about the entire transfer journey so far
तुकाराम मुंढे (सोर्स: एआई फोटो)
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Tukaram Mundhe 25th Transfer: अपनी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के लिए चर्चित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अन्न एवं औषध प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाल लिया है,। महज 20 साल के प्रशासनिक करियर में यह उनका 25वां तबादला है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाले मुंढे का यह तबादला ऐसे समय में हुआ है, जब दिव्यांग कल्याण विभाग में फर्जी प्रमाणपत्रों के खिलाफ उनकी बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी। अब उनके सामने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे एफडीए (FDA) विभाग में साफ-सफाई करने की नई चुनौती है।

तुकाराम मुंढे ने हाल ही में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित मुख्यालय में अन्न एवं औषध प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला है। इससे पहले, उनका तबादला दिव्यांग विभाग से राज्य आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और राहत कार्य विभाग में किया गया था, लेकिन वहां डेढ़ महीना पूरा होने से पहले ही उन्हें नई जिम्मेदारी दे दी गई।

दिव्यांग कल्याण विभाग में क्या हुआ था?

अपनी नई नियुक्ति से पहले, मुंढे दिव्यांग कल्याण विभाग में आयुक्त के रूप में कार्यरत थे। वहां उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कड़ी कार्रवाई की थी। हालांकि, 31 मार्च को उनके तबादले के आदेश के बाद यह कार्रवाई रुक गई, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और सरकार की आलोचना भी हुई थी।

FDA में नियुक्ति के पीछे के कारण

अन्न एवं औषध प्रशासन विभाग पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों के कारण विवादों में रहा है। मुंढे की छवि एक सख्त और ईमानदार अधिकारी की है, इसलिए उन्हें इस विभाग को साफ करने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, मुंढे इस पद को स्वीकार करने में शुरुआत में संकोच कर रहे थे क्योंकि वह 20 साल के अनुभवी अधिकारी हैं, जबकि एफडीए आयुक्त का पद अक्सर कनिष्ठ या पदोन्नत आईएएस अधिकारियों को दिया जाता है। इसके अलावा, एफडीए के सचिव धीरज कुमार उनके ही बैच के अधिकारी हैं, जिसके कारण रिपोर्टिंग को लेकर भी तकनीकी पेच था।

तुकाराम मुंढे के अब तक हुए तबादलों की सूची

वर्ष / महीना पद स्थान / विभाग
अगस्त 2005 प्रशिक्षणार्थी, उपजिलाधिकारी सोलापुर
सितंबर 2007 उप जिलाधिकारी देगलूर उपविभाग
जनवरी 2008 मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जिला परिषद, नागपुर
मार्च 2009 आयुक्त आदिवासी विभाग
जुलाई 2009 मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) वाशिम
जून 2010 मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कल्याण
जून 2011 जिलाधिकारी जालना
सितंबर 2012 बिक्री कर सहआयुक्त मुंबई
नवंबर 2014 जिलाधिकारी सोलापुर

महानगरपालिका और राज्य स्तरीय पद (2016 - 2020)

वर्ष / महीना पद स्थान / विभाग
मई 2016 आयुक्त नवी मुंबई महानगरपालिका
मार्च 2017 मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीएमपीएल (PMPL), पुणे
फरवरी 2018 आयुक्त नासिक महानगरपालिका
नवंबर 2018 सहसचिव नियोजन विभाग
दिसंबर 2018 परियोजना अधिकारी एड्स नियंत्रण, मुंबई
जनवरी 2020 आयुक्त नागपुर महानगरपालिका
अगस्त 2020 सदस्य सचिव महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण, मुंबई

राष्ट्रीय और विविध विभाग (2021 - 2024)

वर्ष / महीना पद / विभाग स्थान / संस्था
जनवरी 2021 अधिकारी / नियुक्ति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
जुलाई 2022 अधिकारी / नियुक्ति पशुपालन और दुग्ध विकास विभाग
सितंबर 2022 आयुक्त स्वास्थ्य सेवा एवं निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
2022 अधिकारी / नियुक्ति मराठी भाषा विभाग
जून 2024 विकास आयुक्त (असंगठित श्रमिक) असंगठित श्रमिक विभाग

हालिया तबादले (2025 - वर्तमान)

वर्ष / महीना पद विभाग / संस्था
मार्च 2024 (लगभग) अधिकारी / नियुक्ति राज्य आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं राहत कार्य विभाग
अगस्त 2025 सचिव दिव्यांग कल्याण आयुक्तालय, मंत्रालय
वर्तमान नियुक्ति आयुक्त अन्न एवं औषध प्रशासन (FDA)  यह उनके करियर का 25वां तबादला माना जा रहा है

क्या है बार-बार तबादले होने का कारण

तुकाराम मुंढे को एक निडर, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी माना जाता है, जो नियमों के साथ समझौता नहीं करते हैं। वे जिस भी विभाग में जाते हैं, वहां अनियमितताओं को दूर करने के लिए साफ-सफाई शुरू कर देते हैं। उदाहरण के लिए, दिव्यांग विभाग में उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले सैकड़ों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। उनके तबादले अक्सर तब होते हैं जब उनकी कार्रवाई राजनीतिक नेताओं से जुड़े बोगस संस्थानों या प्रभावशाली अधिकारियों के खिलाफ होती है। अक्सर जैसे ही वे किसी विभाग में ठोस सुधार लाना शुरू करते हैं, उनकी अचानक वहां से विदाई कर दी जाती है, ताकि चल रही कार्रवाई रुक जाए। यही कारण है कि 20 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है।

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