मंचर में ट्रैफिक बना लोगों के लिए सिरदर्द, सड़कों पर जाम तो गलियों में मच्छरों का आतंक
Pune News: मंचर में बढ़ता ट्रैफिक जाम और पार्किंग की अव्यवस्था लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। खुले नाले और गंदे पानी के जमाव से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ा, जिससे नागरिकों में आक्रोश है।
- Written By: सोनाली चावरे
मंचर में बढ़ता ट्रैफिक जाम (pic credit; social media)
Manchar Traffic Jam Problem: मंचर शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या अब आम लोगों के धैर्य की परीक्षा बन चुकी है। बाजार क्षेत्र में बढ़ते वाहनों और पार्किंग की अव्यवस्था के कारण हर दिन जाम की स्थिति बनती है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी हों या दफ्तर आने-जाने वाले कर्मचारी, हर कोई ट्रैफिक की इस मार से परेशान है।
मंचर, आंबेगांव तालुका का सबसे बड़ा बाजार क्षेत्र है। दिनभर आसपास के गांवों से सैकड़ों नागरिक खरीदारी और कामकाज के लिए यहां आते हैं। लेकिन सड़कों पर वाहनों की बेतरतीब पार्किंग और यातायात नियंत्रण के अभाव में पूरा शहर एक ‘पार्किंग जोन’ बनकर रह गया है। लक्ष्मी रोड, पिंपलगांव रोड, पिंपळगांव चौक, मुलेवाडी चौक और समाधान होटल के पास तो रोजाना वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में ट्रैफिक पुलिस की तैनाती ना होने से स्थिति और बिगड़ रही है। कई बार बड़े वाहन या बसें बाजार में प्रवेश करते हैं तो पहले से खड़ी गाड़ियों के कारण पूरे रास्ते पर जाम लग जाता है। इस दौरान घंटों तक वाहन चालकों को धूप में फंसे रहना पड़ता है।
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पूर्व जिला परिषद सदस्य स्वाती सुरेश घुले ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि शहर के भीड़भाड़ वाले चौकों पर ट्रैफिक पुलिस की नियुक्ति की जाए और पार्किंग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।
ट्रैफिक की समस्या के साथ-साथ मंचर में स्वच्छता की स्थिति भी चिंताजनक है। कई इलाकों में खुले नाले और गंदे पानी के जमाव से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मरीजों में इजाफे की आशंका जताई जा रही है।
लाला उबेन बैंक के संचालक मंगेश बाणखेले का कहना है, “मंचर के नागरिक दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ ट्रैफिक जाम तो दूसरी तरफ मच्छरों का प्रकोप। प्रशासन को तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना तब तक अधूरा रहेगा जब तक ट्रैफिक व्यवस्था और सफाई व्यवस्था सुधारी नहीं जाती। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नगर पंचायत प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द कोई ठोस कदम उठाए।
