TET अनिवार्य: महाराष्ट्र के 1.62 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट, 24 नवंबर को दिल्ली में करेंगे आंदोलन

Supreme Court के आदेश के बाद महाराष्ट्र में पहली से आठवीं तक के शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य हुआ। 1.62 लाख शिक्षक प्रभावित, 2027 तक परीक्षा पास करनी होगी, नहीं तो नौकरी खतरे में।
Maharashtra TET Mandatory
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra TET Mandatory: महाराष्ट्र में पहली से आठवीं कक्षा तक कार्यरत शिक्षकों पर अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के अनुसार, 52 वर्ष तक आयु वाले सभी शिक्षकों को अगले दो वर्षों में ‘टीईटी’ उत्तीर्ण करना आवश्यक है। इस फैसले के कारण राज्य के लगभग 1.62 लाख शिक्षकों में चिंता का माहौल है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतिम तिथि सितंबर 2027 है। ‘टीईटी’ परीक्षा वर्ष में केवल एक बार महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित की जाती है। इस वर्ष परीक्षा 23 नवंबर 2025 को होने वाली है और इसके बाद शिक्षकों को केवल दो अवसर ही मिलेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार याचिका नहीं

इस परीक्षा में असफल होने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। इस पृष्ठभूमि में शिक्षक संघों ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है। लेकिन विधि एवं न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार को ऐसी याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ केवल प्रभावित पक्ष यानी शिक्षक संघ ही न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं, ऐसा विभाग ने बताया है। राज्य में कुल प्राथमिक शिक्षक लगभग 3.95 लाख हैं, जिनमें से 1.62 लाख शिक्षकों के लिए टीईटी देना अनिवार्य है। दो साल की अवधि और 52 वर्ष की आयु सीमा को देखते हुए इस निर्णय से राज्य के बड़े हिस्से के शिक्षकों में अस्वस्थता और चिंता उत्पन्न हुई है।

राज्य के प्राथमिक शिक्षकों की स्थिति

  • कुल अनुमानित शिक्षक: 3.95 लाख
  • टीईटी देना अनिवार्य शिक्षकों की संख्या: 1.62 लाख
  • टीईटी उत्तीर्ण होने की समयसीमा: 2 वर्ष
  • टीईटी के लिए आयु सीमा: 52 वर्ष

24 को जंतर-मंतर मैदान पर आंदोलन

इस बीच, कुछ शिक्षकों ने परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए टीईटी देने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि कुछ संघों ने इस निर्णय को रद्द कराने के लिए 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। इस आंदोलन के दौरान राज्य की सभी स्कूलों को बंद रखने का इशारा भी संघों ने दिया है।

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