

PMC State Of Environment Report: पुणे शहर में लगातार बढ़ती गर्मी, धड़ल्ले से कट रहे पेड़ों और बिगड़ते पर्यावरण के बीच पुणेकरों ने महानगर पालिका को कड़ा संदेश दिया है। नागरिकों ने साफ कहा कि यदि शहर को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाना है, तो सबसे पहले हरियाली बढ़ाना अनिवार्य है।
इसके अलावा, पुणे मनपा द्वारा तैयार की जा रही 'स्टेट ऑफ एनवायरनमेंट रिपोर्ट-2025-26' के हालिया सर्वेक्षण में भी कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। लगभग 35 प्रतिशत नागरिकों ने आने वाले पांच वर्षों में वृक्षारोपण और अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने को अपनी सबसे बड़ी पर्यावरणीय प्राथमिकता बताया है।
साफ दर्शाते हैं कि आज का आम नागरिक केवल प्रदूषण को लेकर शिकायतें करने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वह इसके स्थायी समाधान के रूप में बड़े पैमाने पर पौधे लगाने की मांग भी कर रहा है। पुणे शहर में तेजी से घटता हरित क्षेत्र, बढ़ता तापमान, धूल प्रदूषण और छांव की कमी सीधे तौर पर लोगों के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रही है, यही वजह है कि नागरिकों ने हरित क्षेत्र के विस्तार को बाकी तमाम मुद्दों से ऊपर रखा है।
इस सर्वे के अनुसार, 15 प्रतिशत लोगों ने ठोस कचरा प्रबंधन, 13 प्रतिशत लोगों ने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने, 11 प्रतिशत लोगों ने वायु प्रदूषण नियंत्रण, 10 प्रतिशत लोगों ने नदी पुनर्जीवन और 9 प्रतिशत लोगों ने फुटपाथ व साइकिल ट्रैक को जरूरी बताया है।
सर्वेक्षण का सबसे खास पहलू नागरिकों की खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाने की ललक है। करीब 76 प्रतिशत शहरवासियों ने सामुदायिक वृक्षारोपण और पौधों के संरक्षण अभियानों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की इच्छा जताई है।
पर्यावरण के प्रति इस गहरी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 66 प्रतिशत लोग अपनी गाड़ियों के लिए सड़क किनारे मिलने वाली पार्किंग की जगह को छोड़कर वहां पेड़ लगाने के पक्ष में खड़े नजर आए हैं।