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अजितदादा पवार पैनल ने सभी 21 सीटों पर दर्ज की शानदार जीत।
परिवार से गद्दारी करने वाले नेताओं को मतदाताओं ने सिखाया सबक।
संकट के समय पवार परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रही जनता।
Ajit Pawar Panel Victory Someshwar Sugar Mill Election: सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के चुनाव में मतदाताओं ने अजित पवार के परिवार के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। इस नतीजे से अजित पवार के प्रति लोगों के मन में मौजूद प्रेम भी सामने आया है। अजित पवार के नहीं रहने पर उनके परिवार से गद्दारी करने वालों को मतदाताओं ने उनकी जगह दिखा दी है।
यह टिप्पणी राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रवक्ता उमेश पाटील ने की। सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के चुनाव में ‘श्री सोमेश्वर विकासपुरुष अजितदादा पवार पैनल’ ने सभी 21 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाटील बोल रहे थे। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष वीरधवल जगदाले, स्वीकृत नगरसेवक राकेश कामठे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
पाटील ने कहा कि इस चुनाव का संदेश केवल चीनी मिल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में पहुंचा है। कुछ नेता और पदाधिकारी साथ नहीं होने के बावजूद आम मतदाता अजित पवार के परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं, यह नतीजे से स्पष्ट हो गया है।
मिल की सफलता का श्रेय केवल अध्यक्ष के कामकाज को नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे अजित पवार का नेतृत्व महत्वपूर्ण था। मतदाताओं ने मिल की आगे की यात्रा पवार परिवार के नेतृत्व में जारी रखने के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है।
सोमेश्वर चीनी मिल के 13 वर्षों तक अध्यक्ष रहे पुरुषोत्तम जगताप की आलोचना करते हुए पाटील ने कहा कि उन्होंने ऐन वक्त पर धोखा दिया। उनका विद्रोह अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी तैयारी पहले से ही चल रही थी। उन्होंने कहा, “एक ही रात में पैनल, बैनर, मंच और प्रचार की पूरी योजना तैयार नहीं हो सकती। दूसरे दलों से चर्चा करके उनका समर्थन भी एक ही रात में हासिल नहीं किया जा सकता।” इसके जरिए उन्होंने बगावत पूर्वनियोजित होने का आरोप लगाया।
पाटील ने कहा कि अजित पवार के बाद कार्यकर्ताओं का क्या होगा, ऐसा सवाल उठाया जा रहा था। लेकिन उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का नेतृत्व कितना मजबूत है, यह चुनाव ने साबित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार के परिवार को घेरने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि केवल अजित पवार के प्रति प्रेम जताना पर्याप्त नहीं है। खुद को उनका सहयोगी बताने वालों से अपेक्षा थी कि वे उनके परिवार के साथ खड़े रहें। अजित पवार के नहीं रहने पर परिवार का साथ देना उनकी जिम्मेदारी थी।
पाटील के मुताबिक, नामांकन दाखिल करने के दिन सुनेत्रा पवार ने छह घंटे तक इंतजार किया था, लेकिन पुरुषोत्तम जगताप ने ऐन वक्त पर अपना रुख बदल लिया। मतदाताओं को यह बात पसंद नहीं आई और चुनाव परिणाम में इसका असर दिखाई दिया।
पुरंदर तालुका के प्रतिनिधित्व को लेकर संजय जगताप से चुनाव से एक दिन पहले तक बातचीत चल रही थी। पाटील ने दावा किया कि संजय जगताप ने दो सीटों के उम्मीदवार पवार परिवार की ओर से तय किए जाने की मांग की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना रुख बदल लिया।
बागी उम्मीदवारों को भाजपा का कितना समर्थन था, इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि, भाजपा के जिले के जिम्मेदार नेताओं ने बारामती, पुरंदर और सातारा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को पवार परिवार के नेतृत्व वाले पैनल की मदद करने के निर्देश दिए थे, ऐसा दावा भी उमेश पाटील ने किया।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट