

बारामती के सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के चुनाव से पहले एनसीपी में राजनीतिक हलचल तेज।
कारखाने के मौजूदा अध्यक्ष पुरुषोत्तम जगताप को भाजपा का समर्थन करने के आरोप में निलंबित किया गया।
जगताप पर पार्टी से अलग रुख अपनाने और स्वतंत्र समिति गठित करने का आरोप।
एनसीपी के तालुका अध्यक्ष संदीप बंदल ने जगताप के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
Someshwar Cooperative Sugar Factory: महाराष्ट्र के बारामती में सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाना चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ने कारखाने के मौजूदा अध्यक्ष पुरुषोत्तम जगताप के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
जगताप पर पार्टी से बगावत कर भाजपा का समर्थन करने का आरोप है। इस घटनाक्रम से बारामती के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, पुरुषोत्तम जगताप ने अजित पवार गुट से अलग रुख अपनाते हुए भाजपा का समर्थन किया और एक स्वतंत्र समिति का गठन किया। उनके इस कदम के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
रिपोर्ट के अनुसार, एनसीपी के तालुका अध्यक्ष संदीप बंदल ने जगताप के निलंबन की कार्रवाई की। चुनाव से पहले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के खिलाफ लिए गए इस फैसले को स्थानीय राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
इस विवाद पर एनसीपी के युवा नेता जय पवार ने भी प्रतिक्रिया दी। एक चुनावी सभा में भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि यदि सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने का पांच वर्षीय चुनाव निर्विरोध संपन्न होता, तो यह दिवंगत अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होती।
पुरुषोत्तम जगताप के फैसले पर नाराजगी जताते हुए जय पवार ने कहा कि पार्टी की मंशा सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की थी, लेकिन जगताप का विद्रोह पहले से तय लग रहा था। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्हें इस बात का एहसास हो गया था।
जय पवार ने आगे कहा कि पुरुषोत्तम जगताप को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। उनके मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अकेले चीनी कारखाना नहीं चला सकता। उनके बयान से साफ है कि पार्टी नेतृत्व इस चुनाव में एकजुटता बनाए रखने को महत्वपूर्ण मान रहा है।
सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के चुनाव से पहले निलंबन और भाजपा के समर्थन को लेकर उठे विवाद ने पुणे शहर के बारामती की स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। अब चुनाव में विभिन्न गुटों की रणनीति और उनके समर्थन का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।