Maharashtra Politics: शिरूर में ‘किंगमेकर’ की तलाश, पवार-कटके की बढ़ी सक्रियता

Maharashtra Nikaay Chunaav: शिरूर नगर परिषद चुनाव में प्रकाश धारीवाल के हटने से बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है। अब मुकाबला सीधे अशोक पवार और विधायक कटके के बीच हो गया है, जिससे चुनाव बेहद रोचक बन गया है।
Ashok Pawar Vs Dyaneshwar Katke
अशोक पवार Vs ज्ञानेश्वर कटके (सौ. डिजाइन फोटो )
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Pune News In Hindi: शिरूर नगर परिषद चुनाव को लेकर इलाके की राजनीति गरमा गई है। पूर्व विधायक अशोक पवार (शरद पवार गुट) और वर्तमान विधायक ज्ञानेश्वर माऊली कटके (अजीत गुट) के बीच प्रतिष्ठा का सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।

इस चुनावी जंग में सबसे बड़ी घटना यह है कि शिरूर नगर परिषद में 2007 से निर्विवाद रूप से दबदबा बनाए रखने वाले जाने-माने व्यवसायी प्रकाश धारीवाल ने अचानक चुनाव से हटने का फैसला किया है। उनके इस फैसले से स्थानीय राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। धारीवाल के चुनावी मैदान से हटने के बाद अब यह मुकावला पवार और कटके के बीच होगा।

धारीवाल पैटर्न का अंत और नए समीकरण

पिछले कई वर्षों से शिरूर नगर परिषद पर प्रकाश धारीवाल की पकड़ मजबूत रही है। विकास कार्यों की तेज गति, प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय और कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ के कारण शिरूर में 'धारीवाल पैटर्न' स्थापित हो गया था। इसलिए, चुनावों में उनकी अनुपस्थिति को सबसे बड़ी घटना माना जा रहा है। प्रकाश धारीवाल के हटने ने उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं को गहराई से प्रभावित किया है। धारीवाल के अचानक इस फैसले के पीछे के कारणों को लेकर अटकलें तेज हैं, और उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग अब अलग-अलग गुटों में जाता दिख रहा है।

'किंगमेकर' की तलाश हुई शुरू

प्रकाश बारीवाल गुट के कई प्रमुख कार्यकर्ताओं का राजनीतिक पलायन शुरू हो चुका है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी है कि इस पलायन का फायदा किस गुट को मिलेगा, शहर का व्यापारी वर्ग, महिला मतदाता और युवाओं का रुझान इस बार के नतीजी को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा, ऐसे संकेत मिल रहे हैं। भाजपा, मनसे और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) जैसे अन्य दलों की भूमिका भी इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है। धारीवाल के पीछे हटने ने डेढ़ दशक से स्थिर बल रहे राजनीतिक गणित को बदल दिया है। नगरपरिषद चुनाव ने शिरूर के लोगों में अत्सुकता चरम पर पहुंचा दी है कि अब शिरूर का अगला 'किंगमेकर' कौन बनेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई है।

वर्तमान और पूर्व विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर

धारीवाल के पैटर्न के बाद, शिरूर में पहली बार सत्ता और विकास का एक नया समीकरण बन रहा है। यह चुनाव पूर्व विधायक अशोक पवार और मौजूदा विधायक ज्ञानेश्वर माऊली कटके के लिए कोटे की टक्कर का बन गया है। मुख्य मुकाबला एनसीपी (शरद पवार गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) के बीच होने के संकेत है। कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते वह मनपा चुनाव ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

पवार और कटके की तेज होती सक्रियता

पूर्व विधायक अशोक पवार ने पिछले कुछ महीनों से संगठन स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। वह युवा कार्यकर्ताओं को एकजुट करके नगर परिषद में अपनी छाप छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनके गुट की गतिविधियां तेज हो गई हैं, और इस चुनाव में पवार की प्रतिष्ठा एक बड़ी कसौटी पर है।

दूसरी ओर, मौजूदा विधायक कटके अपने नेतृत्व की छाप छोड़ने के लिए बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों के माध्यम से सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं। सत्ता का समर्थन, मजबूत संगठन और युवा मतदाताओं का रुझान देखते हुए कटके समर्थक भी मैदान में पूरी तैयारी के साथ उत्तर चुके हैं।

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