Sharad Pawar supports Rahul Gandhi (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Sharad Pawar on MM Naravane Book: संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान चीन सीमा विवाद और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लद्दाख सीमा पर तनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी सेना पर छोड़ दी थी। इस मुद्दे पर मचे बवाल के बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के प्रमुख शरद पवार ने भी राहुल गांधी का पुरजोर समर्थन किया है। पवार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए था।
बारामती में पत्रकारों से बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि राहुल गांधी जो मुद्दा उठा रहे हैं वह सीधे तौर पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के अनुभवों से जुड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि देश का पूर्व सेना प्रमुख अपनी किताब में कुछ तथ्य लिखता है और विपक्ष उस पर चर्चा करना चाहता है, तो लोकतंत्र में उसे सदन के पटल पर बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। पवार के इस बयान ने दिल्ली की राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा दिया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री सदन में भाषण देने आएंगे, तो वे व्यक्तिगत रूप से जनरल एम.एम. नरवणे की वह किताब उन्हें भेंट करेंगे। राहुल ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में किताब से सीधे उद्धरण (Quotes) पढ़ने से रोका गया, लेकिन किताब की मुख्य बात यही है कि संकट की घड़ी में सरकार के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं थी। राहुल गांधी ने इसे “नेतृत्व की विफलता” करार दिया।
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राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि जब कैलाश रिज पर चीनी टैंक तैनात हो गए थे, तब सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया था। राहुल के अनुसार, “रक्षा मंत्री ने कहा कि वे ‘टॉप’ (प्रधानमंत्री) से पूछकर बताएंगे, लेकिन वहां से कोई ठोस आदेश नहीं आया।” राहुल ने आगे कहा कि बाद में संदेश आया कि ‘जो उचित समझो, वह करो’। राहुल का आरोप है कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है कि उस वक्त वे खुद को बेहद अकेला और असहाय महसूस कर रहे थे क्योंकि सरकार फैसला लेने से हिचक रही थी।
रायबरेली सांसद ने दावा किया कि उस समय भारतीय सेना चीनी घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब देने और फायर करने के लिए तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संदेश आया कि बिना पूछे गोली नहीं चलाई जाएगी। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब सीमा पर दुश्मन खड़ा हो, तो प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी सेना पर कैसे छोड़ सकते हैं? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को यह किताब पढ़नी चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि उनकी “अस्पष्ट नीतियों” के कारण देश के सेना प्रमुख को किस मानसिक स्थिति से गुजरना पड़ा था।