

पुरंदर एयरपोर्ट के लिए बची 40 हेक्टेयर जमीन का जबरन अधिग्रहण होगा।
छह गांवों की 1,216 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है।
अब तक किसानों को ₹4,000 करोड़ मुआवजा मिला, 96% ने सहमति दी।
Purandar International Airport Land Acquisition: पुरंदर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। दो बार समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद करीब 40 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण बाकी है। ऐसे में प्रशासन अब शेष जमीन का जबरन अधिग्रहण करने की तैयारी में है।
प्रशासन के मुताबिक, इस प्रक्रिया के तहत जमीन देने वाले किसानों को सहमति से जमीन देने वाले किसानों की तरह अतिरिक्त सुविधाएं और लाभ नहीं मिलेंगे।
पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए कुंभारवलण, वनपुरी, एखतपुर, पारगांव, मुंजवडी और खानवड़ी सहित छह गांवों की लगभग 1,216 हेक्टेयर यानी करीब 3,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जानी है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण लंबे समय से जारी है और प्रशासन इसे जल्द पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
राज्य सरकार ने अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के लिए प्रति एकड़ 1 करोड़ 61 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके अलावा जमीन पर मौजूद पेड़ों, कुओं और अन्य निर्माणों के लिए अलग से मुआवजे का प्रावधान भी बताया गया है।
भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सहमति पत्र लेने की समयसीमा दो बार बढ़ाई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत किसानों ने जमीन देने पर सहमति जताई है, जबकि लगभग 76 प्रतिशत जमीन पर प्रशासन को कब्जा मिल चुका है।
राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए फंड से अब तक किसानों के बैंक खातों में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का मुआवजा ट्रांसफर किया गया है। इसके बावजूद कुछ जमीन का अधिग्रहण लंबित है। प्रशासन अब शेष जमीन हासिल करने के लिए आगे की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी में है।
जबरन अधिग्रहण की स्थिति में अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिलने की बात से प्रभावित किसानों के बीच चिंता बढ़ सकती है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की शेष प्रक्रिया, मुआवजे की शर्तों और किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। पुरंदर एयरपोर्ट परियोजना की प्रगति काफी हद तक जमीन अधिग्रहण पूरा होने पर निर्भर करेगी।