

पुणे जिला परिषद ने जल संरक्षण के 211 कार्य प्रस्तावित किए।
तालाबों और बांधों की मरम्मत से जल संचयन बढ़ेगा।
किसानों को गाद परिवहन के लिए ₹34.75 प्रति घन मीटर अनुदान मिलेगा।
Pune ZP Water Conservation Plan: पुणे जिले में आगामी जल संकट से निपटने और वर्षा जल का अधिकतम संचयन करने के लिए जिला परिषद ने व्यापक जल संरक्षण योजना तैयार की है। इसके तहत अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त रिसाव तालाबों, मोड़ बांधों, गांव तालाबों और भंडारण बांधों की मरम्मत की जाएगी।
जिला परिषद के लघु सिंचाई विभाग ने इस संबंध में प्रारूप योजना तैयार कर मंजूरी के लिए जिला नियोजन समिति को सौंप दी है। योजना का उद्देश्य वर्षा जल की हर बूंद को सहेजना, भूजल स्तर बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा मजबूत करना है।
जिले की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध जल स्रोतों के तकनीकी अध्ययन के आधार पर तैयार इस योजना में केवल टैंकरों से अस्थायी जलापूर्ति के बजाय स्थायी जल प्रबंधन पर जोर दिया गया है। इसके तहत गांवों में विकेंद्रीकृत जल भंडारण संरचनाओं का विकास करने के साथ पुराने तालाबों और बांधों की जल संग्रहण एवं सिंचाई क्षमता बहाल की जाएगी। इससे जल संकटग्रस्त और सूखाग्रस्त क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अल नीनो के संभावित प्रभाव और भविष्य में जल संकट की आशंका को देखते हुए 31 अगस्त 2027 तक उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रबंधन की योजना बनाई गई है। इसके तहत जल स्रोतों की मरम्मत, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। जल निकायों की भंडारण क्षमता बढ़ाकर भविष्य के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना इसका प्रमुख लक्ष्य है। जल संचयन और किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए 'गाद मुक्त बांध, गाद युक्त खेत' अभियान के तहत जिले में कुल 211 कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।
योजना के तहत किसानों को गाद परिवहन के लिए 34.75 रुपये प्रति घन मीटर अनुदान दिया जाएगा। एक एकड़ भूमि के लिए अधिकतम 15,000 रुपये और दो एकड़ के लिए अधिकतम 30,500 रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। अभियान में लघु एवं सीमांत किसानों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और आत्महत्या प्रभावित किसान परिवारों के पात्र लाभार्थियों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनभागीदारी पर भी जोर दिया गया है। जिला परिषद का मानना है कि प्रस्तावित कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट कम होगा और खेती के लिए संरक्षित सिंचाई की सुविधा मजबूत होगी।
सूखा राहत प्रारूप योजना को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने में जनभागीदारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित कार्यों को समय पर मंजूरी मिलने और प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट कम करने के साथ कृषि को संरक्षित सिंचाई उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
गौरव बोरकर, कार्यकारी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग, जिला परिषद, पुणे