

Highlights:
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण समारोह के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजामों से स्थानीय नागरिकों को परेशानी हुई।
सुरक्षा कारणों से आम लोगों को रामकुंड और मुख्य कार्यक्रम स्थल से दूर रखा गया, जिससे नाराजगी बढ़ी।
फेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप पर प्रशासन के खिलाफ व्यंग्यात्मक पोस्ट, मीम्स और प्रतिक्रियाएं वायरल हो रही हैं।
Nashik Flag Hoisting Ceremony: त्र्यंबकेश्वर और नासिक क्षेत्र में वीवीआईपी की उपस्थिति में संपन्न हुए ध्वजारोहण समारोह के अवसर पर लगाए गए कड़े सुरक्षा घेरे के प्रभाव अब सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर नासिकवासियों को मुख्य कार्यक्रम और रामकुंड क्षेत्र से दूर रोके जाने पर भड़के नेटिजन्स ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। इस मुद्दे को लेकर फिलहाल सोशल मीडिया का माहौल काफी गरमा गया है।
सड़कें बंद होने, सख्त नाकाबंदी और स्थानीय लोगों को हुई असुविधा को लेकर फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर मीम्स और गुस्से से भरी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। जिरली का नासिककर?, यह कुंभमेला नासिक का है या बाहर वालों का? जैसी व्यंगात्मक पोस्ट्स इस समय जमकर ट्रेंड हो रही हैं। वीवीआईपी के स्वागत के लिए स्थानीय निवासियों को उन्हीं के शहर में 'बेगाना' बना देने की प्रशासनिक नीति पर नागरिकों द्वारा कड़े शब्दों में निशाना साधा जा रहा है।
दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों से स्थानीय लोगों को रामकुंड से दूर रखने को कुछ लोगों द्वारा प्रशासनिक सुविधा और सुरक्षा का 'लाभ' बताया जा रहा है, लेकिन नासिक के नागरिकों ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अपने ही पवित्र रामकुंड से नागरिकों को दूर रखना किस बात का फायदा? यह तो स्थानीय लोगों के अधिकारों पर कुठाराघात है, जैसी तीखी प्रतिक्रियाएं नेटिजन्स व्यक्त कर रहे हैं।
ध्वजारोहण के दिन हुई इस अव्यवस्था को देखते हुए आगामी सिंहस्थ कुंभमेले को लेकर नागरिकों में भारी चिंता पैदा हो गई है। रामकुंड और गोदाघाट क्षेत्र की संकरी सड़कों को देखते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि क्या कुंभमेले के दौरान भी सुरक्षा का इसी तरह अतिरेक करके नासिकवासियों को रामकुंड जाने से रोका जाएगा? सोशल मीडिया पर अब यह मांग तेजी से उठ रही है कि प्रशासन 'सुरक्षा के इस अतिरेक' को रोके और आगामी सिंहस्थ में स्थानीय नागरिकों को विश्वास में लेकर योजना बनाए।
हालांकि, परिस्थितियों को देखा जाए तो भौगोलिक कारणों से रामकुंड पर भारी भीड़ जुटना सभी के दृष्टिकोण से जोखिम भरा है, जिस पर प्रशासन को विचार करना ही पड़ता है। लेकिन यह करते समय संयम और तालमेल नहीं बिठाया गया, तो आम जनता का भड़कना स्वाभाविक है। साल 2015 के कुंभमेले में भी सभी ने यही स्थिति झेली थी।