पुणे जिला परिषद शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला? शिक्षाधिकारी पर रिश्वत और अवैध तबादलों के आरोप
Pune ZP के माध्यमिक शिक्षाधिकारी पर अल्पसंख्यक स्कूलों में अवैध मान्यता और 250 से अधिक शिक्षकों के कथित अवैध तबादलों के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के आदेश जारी हुए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे जिला परिषद (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Zilla Parishad Education Scam: जिला परिषद का माध्यमिक शिक्षा विभाग बड़े घोटाले की चपेट में आता दिख रहा है। माध्यमिक शिक्षाधिकारी भाऊसाहेब कारेकर पर जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच अपने कार्यकाल के दौरान गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार इसको लेकर शिकायत दर्ज कराई है। उसके बाद प्रशासन विभाग की शिक्षा उप संचालक स्मिता गौड ने माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की उप संचालक सुचिता पाटेकर को जांच के आदेश दिये है।
अल्पसंख्यक स्कूलों में धांधली का पर्दाफाश
अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती को नियम विरुद्ध मान्यता देने के लिए प्रति पद 5 लाख रुपये की मांग की गई। आरोप है कि कार्यालय के कर्मचारी विराज खराटे इस पूरी वसूली प्रक्रिया के मुख्य सूत्रधार थे, जो लाभार्थियों से पैसा लेकर शिक्षाधिकारी तक पहुंचाते थे। अब तक ऐसे 30 पदों को अवैध रूप से मान्यता देने की बात सामने आई है।
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इस भ्रष्ट कार्यप्रणाली के कारण शिक्षण 66 संस्थाओं और शिक्षको को भारी – मानसिक और आर्थिक कष्ट उठाना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो शिक्षा मंत्री के समक्ष तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
– संभाजीराव शिरसाट, राज्य उपाध्यक्ष, शिक्षक सेना
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250 से अधिक शिक्षकों के किए गए थे अवैध तबादले
- विजय वडेट्टीवार ने शिक्षा आयुक्त को दिए अपने निवेदन में स्पष्ट किया है कि शिक्षाधिकारी कार्रकर ने 15 मार्च 2023 के शासन निर्णय का खुलेआम उल्लंघन किया है। आरोप है कि अतिरिक्त शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का समायोजन करते समय प्रत्येक कर्मचारी से लाखों रुपये की रिश्वत ली गई।
- लगभग 100 से अधिक ऐसे मामले सामने आए है जहां नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तिया की गई। इसके अलावा, सबसे गंभीर आरोप विनाअनुदानित स्कूलों से अनुदानित स्कूलों में शिक्षकों के तबादलों को लेकर है। 29 अप्रैल 2024 और 3 अक्टूबर 2024 के सरकारी आदेशों की अनदेखी कर लगभग 250 से अधिक शिक्षकों के अवैध तबादले किए गए। इस प्रक्रिया में सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने और शिक्षकों से अवैध वसूली करने का दावा किया गया है।
