पुणे जिला परिषद का बड़ा फैसला, मौखिक आदेश से रोकी गई 75 करोड़ रुपये की निधि, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

Pune Zilla Parishad Fund: पुणे जिला परिषद के ₹301 करोड़ के मूल बजट में से 25 प्रतिशत यानी ₹75 करोड़ की राशि मौखिक आदेश से आरक्षित कर दी गई है, जिससे विकास कार्यों के नियोजन पर ब्रेक लग गया है।
Major decision by Pune Zilla Parishad: ₹75 crore in funds halted via verbal order
पुणे जिला परिषद सोर्स- सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • पुणे जिला परिषद के ₹301 करोड़ के बजट में ₹75 करोड़ आरक्षित।

  • मौखिक आदेश से निधि रोकने पर जनप्रतिनिधियों में नाराजगी।

  • विकास कार्यों और प्रशासनिक मंजूरी पर असर पड़ने की आशंका।

Pune Zilla Parishad Budget: स्थानीय जिला परिषद के वर्ष 2026-27 के 301 करोड़ रुपये के मूल बजट में से 25 प्रतिशत यानी लगभग 75 करोड़ रुपये की राशि मौखिक आदेश से आरक्षित रखी गई है। इस अचानक लिए गए फैसले से जिला परिषद (जेडपी) के विकास कार्यों के नियोजन पर ब्रेक लग गया है।

बजट मंजूर होने के बाद 17 विभागों को खाता-वार आवंटन किया जा चुका था। अब जिला परिषद के सभापतियों और विभागाध्यक्षों को केवल 75 प्रतिशत निधि में ही काम चलाने की कसरत करनी पड़ रही है। आधिकारिक जानकारी के बिना इतनी बड़ी राशि रोके जाने से प्रशासन के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

जिला परिषद का बजट पारित होने के बाद विभिन्न विभागों को वित्तीय प्रावधानों के उद्धरण जारी किए गए थे। विषय समितियों के माध्यम से विकास कार्यों को अंतिम रूप देकर प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया जारी थी।

इसी दौरान विभागाध्यक्षों के जरिए सभापतियों तक बजट की 25 प्रतिशत राशि आरक्षित रखने का संदेश पहुंचाया गया। इस अप्रत्याशित कदम से पहले से तय किए गए विकास कार्यों में से किन कामों को बरकरार रखा जाए।

जिप के फैसले की पारदर्शिता पर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी

निधि आरक्षित करने का निर्देश किसने दिया, इसके पीछे क्या कारण है और इस राशि का उपयोग कब होगा, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। सभापतियों को लिखित सूचना देने के बजाय केवल मौखिक संदेश दिया गया है।

इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि पुणे जिला परिषद के कामकाज में जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिया जा रहा है या नहीं। इस फैसले की पारदर्शिता पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई है और मांग की है कि इस राशि के उपयोग के बारे में स्थिति स्पष्ट की जाए।

Major decision by Pune Zilla Parishad: ₹75 crore in funds halted via verbal order
नदियों को बचाने के लिए बने प्रभावी कानून, जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने दिया नया नारा

आचार संहिता का प्रभाव

बजट की शत-प्रतिशत राशि को ध्यान में रखकर सदस्यों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास कार्यों का खाका तैयार किया था। अब निधि पर सीमा तय हो जाने से प्रस्तावित कार्यों की दोबारा जांच करनी पड़ रही है।

इस निर्णय का सीधा असर निर्माण, समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल कल्याण विभागों के कार्यों पर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण समितियों के कामकाज और प्रशासनिक स्वीकृति प्रक्रिया पर भी विपरीत असर पड़ा है।

Major decision by Pune Zilla Parishad: ₹75 crore in funds halted via verbal order
पुणे-शिरूर हाईवे निर्माण में अनियमितता के आरोप, किसानों को मुआवजा देने और जांच होने तक काम रोकने की मांग

25 प्रतिशत निधि मौखिक निर्देशों के कारण सदस्यों में भारी असंतोष है। इतना महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय सदस्यों को विश्वास में लेना अनिवार्य था। निधि कटौती के बाद शेष राशि का नियोजन किस प्रकार किया जाएगा, इसकी भी कोई जानकारी नहीं दी गई है। प्रशासन को इस संबंध में तुरंत अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

शिवाजीराव बुचड़े-पाटील, गुट नेता, भाजपा, जिला परिषद, पुणे

आरक्षित रखी गई 75 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग कब और किन विकास कार्यों के लिए किया जाएगा, इसकी सटीक जानकारी सभी सदस्यों को मिलना बेहद आवश्यक है। प्रशासन को इस निर्णय की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

विजयसिंह शिंदे, गुट नेता, शिवसेना (यूबीटी), जिला परिषद, पुणे

Navbharat Live
navbharatlive.com