पुणे-शिरूर हाईवे निर्माण में अनियमितता के आरोप, किसानों को मुआवजा देने और जांच होने तक काम रोकने की मांग

Maharashtra Highway Project: पुणे-शिरूर राष्ट्रीय राजमार्ग 753F के निर्माण में अनियमितता और मुआवजे में देरी का आरोप लगाते हुए क्रांतिवीर प्रतिष्ठान ने जांच होने तक काम रोकने की मांग की है।
Allegations of irregularities in the construction of the Pune-Shirur highway
पुणे शिरूर हाईवे परियोजना सोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • पुणे-शिरूर हाईवे निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग।

  • ₹4,104 करोड़ की परियोजना की लागत और लंबाई पर सवाल।

  • मुआवजा मिलने तक प्रभावित जमीनों पर निर्माण रोकने की मांग।

Pune Shirur Highway Project: पुणे-शिरूर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 753 एफ के निर्माण कार्य को लेकर कथित अनियमितताओं, परियोजना की लागत और सड़क की लंबाई में अंतर तथा प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने के आरोप सामने आए हैं।

क्रांतिवीर प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष संजय शिवाजी पाचंगे ने इस मामले में मुख्यमंत्री, सार्वजनिक निर्माण मंत्री और महाराष्ट्र राज्य अवसंरचना विकास महामंडल के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने परियोजना की स्वतंत्र जांच कराने और जांच पूरी होने तक संबंधित निर्माण कार्य रोकने की मांग की है।

4,104 करोड़ रुपये की लागत पर सवाल

ज्ञापन के अनुसार, अगस्त 2025 में जारी निविदा में करीब 53.40 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले पुणे-शिरूर महामार्ग की अनुमानित निर्माण लागत 4,104 करोड़ रुपये बताई गई थी। पाचंगे का आरोप है कि परियोजना से जुड़े अलग-अलग प्रशासनिक विवरणों में सड़क की लंबाई और निर्माण लागत के अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।

उन्होंने इन अंतरों का स्पष्टीकरण देने, परियोजना पर होने वाले खर्च का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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किसानों को मुआवजा देने की मांग

पाचंगे ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर जमीन की माप और सीमांकन तथा मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए बिना किसानों की जमीन पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण के दौरान खेतों में खड़े पुराने पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी उठाया।

ज्ञापन में संबंधित विभागों से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने, किसानों की शिकायतों का निपटारा करने और उचित मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित जमीनों पर निर्माण रोकने की मांग की गई है।

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टोल वसूली की अवधि भी सार्वजनिक करने की मांग

पुणे शहर महामार्ग की संशोधित योजना, सड़क की लंबाई और निर्माण लागत के अलावा परियोजना के तहत कितने वर्षों तक टोल वसूला जाएगा, इस पर भी स्पष्ट जानकारी मांगी गई है। पाचंगे का कहना है कि परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय विवरण नागरिकों के लिए सार्वजनिक होने चाहिए।

उन्होंने प्रभावित किसानों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए अगले दो दिनों में बड़ी बैठक आयोजित करने की योजना भी बताई। अब इस मामले में संबंधित प्रशासनिक विभागों की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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