पुणे जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव 16 मार्च को, पंचायत समितियों के सभापति 9 मार्च को चुने जाएंगे

NCP majority Pune district: पुणे जिला परिषद और 13 पंचायत समितियों के अध्यक्ष-सभापति चुनाव की तारीखें घोषित हो गई हैं। 9 और 16 मार्च को मतदान होगा। NCP को स्पष्ट बहुमत मिलने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई।
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पुणे जिला परिषद (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune Zilla Parishad President Election 2026: जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव संपन्न होने के तीन सप्ताह बाद आखिरकार प्रशासन ने अध्यक्ष और सभापति पदों के चयन का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित कर दिया है।

जिले की 13 पंचायत समितियों (हवेली, जुन्नर, आंबेगांव, खेड, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड, पुरंदर, भोर, वेल्हे, मुलशी और मावल) के सभापति और उपसभापति का चुनाव 9 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे आयोजित किया जाएगा।

  • इसके पश्चात, पुणे जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए 16 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे मतदान प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन दोनों महत्वपूर्ण चुनावों के दौरान पीठासीन अधिकारी के रूप में अपर जिलाधिकारी कमान संभालेंगे। जिला परिषद के चुनाव परिणामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 73 में से 51 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
  • बहुमत मिलने के बाद अब अध्यक्ष पद के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। वर्तमान में अध्यक्ष पद की दौड़ में वीरधवल जगदाले, पूर्व विधायक रमेश थोरात के पुत्र तुषार थोरात और बारामती पंचायत समिति के पूर्व सभापति करण खलाटे के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।

किसी बाहरी सहयोग की आवश्यकता नहीं : सुनेत्रा

  • इस चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही इच्छुक उम्मीदवारों ने अपनी 'फील्डिंग' लगानी शुरू कर दी है और वरिष्ठ नेताओं के चक्कर काटने शुरू कर दिए है। इस चुनाव में एक दिलचस्प मोड़ महायुति के समीकरणों को लेकर आया है। हालांकि एनसीपी के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन यह देखना उत्सुकता पूर्ण होगा कि वे महायुति के सहयोगी दल भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता में साथ लेते है या नहीं।
  • स्थानीय एनसीपी नेताओं ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सामने स्पष्ट भूमिका रखी है कि बहुमत होने के कारण उन्हें किसी बाहरी सहयोग की आवश्यकता नहीं है और वे एकतरफा सत्ता स्थापित करना चाहते हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस के इस कड़े रुख के बाद अब अंतिम निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व के पाले में है, जिससे जिले की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
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