पुणे मुंढ़वा जैकवेल (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Water Crisis Mundhwa Jackwell: शहर में इस वर्ष मानसून की देरी की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जल संसाधन विभाग द्वारा पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) को 15 प्रतिशत पानी कटौती का नोटिस दिए जाने के बाद शहर में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘मुंढवा जैकवेल परियोजना’ की विफलता मुख्य कारण बनकर उभरी है। सजग नागरिक मंच का आरोप है कि प्रशासन ने करोड़ों की लागत से बने इस जैकवेल का सही उपयोग किया होता, तो आज पानी कटौती की तलवार नहीं लटक रही होती। प्रशासन की प्रबंधकीय लापरवाही को ढाल बनाकर अब पीने के पानी पर कैंची चलाने की तैयारी की जा रही है, जिसका तीव्र विरोध शुरू हो गया है।
जल संकट से निपटने के लिए जल आपूर्ति विभाग दो विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसके तहत शहर में सप्ताह में एक दिन पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद रखी जा सकती है। वहीं, दूसरा विकल्प ‘अल्टरनेट डे सप्लाई’ यानी एक दिन छोड़कर पानी देने का है।
मंच के अध्यक्ष विवेक वेलणकर ने आंकड़ों के साथ प्रशासन की पोल खोली है। उन्होंने बताया कि पुणे मनपा प्रतिदिन लगभग 650 एमएलडी सीवेज के पानी को खेती योग्य शुद्ध करती है। नियमतः इस पानी को मुंढवा जैकवेल के जरिए बेबी कैनाल तक पहुंचाकर खेती के लिए दिया जाना चाहिए, ताकि बांधों का शुद्ध पानी पीने के लिए बचाया जा सके।
ये भी पढ़ें :- Dharashiv में शिंदे का विपक्ष पर हमला, बोले- ‘बगावत सत्ता के लिए नहीं, शिवसेना बचाने के लिए थी’
वेलणकर ने बताया कि लेकिन हकीकत में, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच प्रशासन अपनी क्षमता का आधा पानी भी नहीं उठा सका और केवल 250 एमएलडी पानी ही प्रोसेस हुआ। यदि जैकवेल पूरी क्षमता से चलता, तो पिछले चार महीनों में 1.75 टीएमसी पानी की बचत हो सकती थी। वर्तमान में जैकवेल के अप्रभावी होने के कारण खडकवासला डैम से पानी छोड़ना पड़ रहा है, जो शहर की जल सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।