

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला।
शिंदे गुट ने निर्दलीय सचिन सानप को समर्थन दिया।
शिवसेना के फैसले से भाजपा उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे की चुनौती बढ़ी।
Pune Teachers MLC Election: पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में चतुष्कोणीय मुकाबले की तस्वीर सामने आई है। कांग्रेस के जयंत आसगावकर, राष्ट्रीय समाज पक्ष (रासप) के दत्तात्रय सावंत, भाजपा के कौस्तुभ गावडे और निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप के बीच मुकाबला होगा।
इस बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से सचिन सानप को समर्थन देने की घोषणा के बाद महायुति के भीतर राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। भाजपा ने इस सीट से कौस्तुभ गावडे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में सहयोगी शिवसेना का निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में उतरना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
एकनाथ शिंदे ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान सचिन सानप को समर्थन देने की घोषणा की। इससे पहले मुंबई स्थित उनके नंदनवन निवास पर विधान परिषद चुनाव को लेकर देर रात तक बैठक हुई थी। बताया जाता है कि बैठक में शिवसेना के नेताओं ने सानप का समर्थन करने की पैरवी की। उनका तर्क था कि संगठन के विस्तार के लिए ऐसे फैसले जरूरी हैं।
मंत्री शंभूराज देसाई ने भी कहा था कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपना संगठन बढ़ाने का अधिकार है। शिंदे के फैसले से पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि महायुति के घटक दलों के बीच तालमेल की परीक्षा भी बन गया है।
सचिन सानप ने पहले शिवसेना से उम्मीदवारी मांगी थी। हालांकि, पुणे शहर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट भाजपा के खाते में जाने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। सानप उद्योग मंत्री उदय सामंत के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) के रूप में भी काम कर चुके हैं।
भाजपा ने कौस्तुभ गावडे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में शिवसेना की ओर से सानप को समर्थन मिलने से भाजपा के सामने चुनौती बढ़ सकती है। चुनाव में सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का रुख अहम रहेगा।
शिवसेना के समर्थन से सानप की उम्मीदवारी को राजनीतिक मजबूती मिलने की संभावना है, लेकिन इसका वास्तविक असर मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि शिंदे के फैसले से महायुति के भीतर मतों का समीकरण कितना बदलता है और भाजपा अपने उम्मीदवार के पक्ष में कितना समर्थन जुटा पाती है।