

बीएमसी की एफडी 5 साल में ₹13,785 करोड़ घटने का दावा।
₹2.44 लाख करोड़ की परियोजनाओं पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल।
नई खुदाई नीति से बीएमसी को सालाना ₹200 करोड़ नुकसान का दावा।
BMC FD White Paper Demand: बीएमसी की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में पिछले पांच वर्षों में करीब 13,785 करोड़ रुपये की गिरावट और लगभग 2।44 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की वित्तीय प्रतिबद्धताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस के बीएमसी ग्रुप लीडर अशरफ आजमी ने मनपा के वित्तीय प्रबंधन पर श्वेत पत्र जारी करने और इस मुद्दे पर विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में मनपा आयुक्त को पत्र लिखने के साथ महापौर से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है।
आजमी के अनुसार, प्रशासक के कार्यकाल में करीब 2।44 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की गई या उनके लिए वित्तीय प्रतिबद्धताएं की गईं। इन परियोजनाओं के तहत चालू वित्त वर्ष में ठेकेदारों को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।
वहीं, आगामी सात से आठ वर्षों तक हर साल करीब 28,000 करोड़ रुपये के भुगतान का अनुमान जताया गया है। इनमें वर्सोवा दहिसर कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड, सीमेंट-कंक्रीट सड़कें, सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और जलापूर्ति परियोजनाएं शामिल हैं।
आजमी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में बीएमसी की एफडी करीब 81,449 करोड़ रुपये थी,
जो घटकर 77,905 करोड़ रुपये रह गई। वर्ष 2021 में एफडी लगभग 91,690 करोड़ रुपये थी। इस तरह पांच वर्षों में करीब 13,785 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज होने का दावा किया गया है।
आजमी ने मांग की है कि श्वेत पत्र में एफडी का वर्षवार विवरण, निकासी और हस्तांतरण का हिसाब, खर्चों की मंजूरी परियोजनावार लंबित बिल और भविष्य के भुगतान की समय-सारणी शामिल की जाए। साथ ही आगामी वर्षों की अनुमानित आय और खर्च का ब्यौरा भी सार्वजनिक किया जाए उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य धन गायब होने का आरोप लगाना नहीं, बल्कि वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजनाओं का भुगतान कैसे होगा और वेतन, पेंशन तथा नागरिक सुविधाओं के लिए पर्याप्त धन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा, आजमी ने महापौर से विशेष अधिवेशन बुलाकर निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने वित्तीय स्थिति पर चर्चा कराने की अपील की है।
मुंबई बीएमसी के खजाने पर सीधे 200 करोड़ रुपये का बोझ डालने और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाली विवादित 'खुदाई और पुनर्भरण नीति 2026' को बुधवार को स्थायी समिति में बहुमत के बल पर मंजूरी दे दी गई। दूरसंचार और अन्य भूमिगत सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के शुल्क में 60 प्रतिशत तक की कटौती करने के फैसले का विरोध करते हुए विपक्षी दलों ने सत्ताधारियों पर मुंबई शहर की सड़कों को निजी कंपनियों के हवाले करने का आरोप लगाया।
शिवसेना, कांग्रेस, (मनसे) और एआईएमआईएम समेत सभी विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा करते हुए सदन से वॉकआउट किया। फिलहाल, मुंबई बीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले फुटपाथों और सड़कों पर खुदाई करने के लिए 2023 के नियमों के अनुसार शुल्क लिया जाता है। हालांकि, नई 'खुदाई और पुनर्भरण मार्गदर्शिका 2026' के तहत सीमेंट कंक्रीट की सड़कों का निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान ही उपयोगिता सेवाओं की भूमिगत लाइन बिछाने पर शुल्क में भारी कटौती की गई है। पहले जहां प्रति मीटर 6,711 रुपये शुल्क लिया जाता था, वहीं अब इसे घटाकर 2,300 रुपये कर दिया गया है।