राम नदी प्रदूषण पर NGT का कड़ा रुख, पुणे मनपा और PMRDA को टूटे चेंबरों की मरम्मत के लिए 2 महीने की मोहलत

Ram Nadi River Pollution: राम नदी प्रदूषण मामले में NGT ने पुणे मनपा, PMRDA और ग्राम पंचायतों को टूटे चेंबरों की मरम्मत के लिए 2 महीने की समयसीमा दी है। अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
NGT takes a tough stance on Ram River pollution
नदी प्रदूषण, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Pune Municipal Corporation: राम नदी प्रदूषण मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पुणे मनपा, पीएमआरडीए और संबंधित ग्राम पंचायतों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने टूटी चेंबरों की मरम्मत और उनके नियमित रखरखाव के लिए संबंधित एजेंसियों को दो महीने की समयसीमा दी है।

दो महीने में पूरी करनी होगी कार्रवाई

NGT ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित प्रतिवादियों को निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। आदेश के दायरे में पुणे मनपा, पीएमआरडीए के साथ भुगांव और भुकूम ग्राम पंचायतें शामिल हैं। अधिकरण के निर्देश के बाद अब संबंधित एजेंसियों को नदी में प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा।

चेंबरों की मरम्मत का उठा मुद्दा

राम नदी प्रदूषण को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान आवेदक एडवोकेट कृणाल नारायण घारे ने टूटी हुई चेंबरों की मरम्मत और उनके नियमित रखरखाव के लिए दो महीने का समय देने का अनुरोध किया था।

NGT ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए संबंधित प्रतिवादियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

आरोप-प्रत्यारोप के बजाय काम पर जोर

एडवोकेट घारे ने कहा कि राम नदी में नदी प्रदूषण रोकने के लिए केवल आरोप-प्रत्यारोप से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि निर्धारित समयसीमा के भीतर चेंबरों की मरम्मत और रखरखाव का काम पूरा किया जाएगा।

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समय पर काम नहीं हुआ तो कड़े कदम की मांग

घारे ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दो महीने की समयसीमा में आवश्यक काम पूरा नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई के दौरान अधिकरण से कड़े उपायों की मांग की जाएगी। इससे संबंधित विभागों पर समयसीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

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26 नवंबर को अगली सुनवाई

पुणे शहर के राम नदी प्रदूषण से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। इस दौरान निर्धारित समयसीमा में संबंधित एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

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