पुणे महानगर पालिका (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

Pune PMC में खुला टकराव, फंड कंट्रोल को लेकर आयुक्त और पार्षद आमने-सामने

Pune PMC Financial Committee को लेकर प्रशासन और नगरसेवकों के बीच तीखा विवाद सामने आया है। विकास कार्यों में देरी और अधिकारों के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

अपूर्वा नायक

Pune PMC Financial Committee Conflict: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) में विकास कार्यों की कमान और वित्तीय नियंत्रण को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहा शीतयुद्ध अब खुले संघर्ष में बदल गया है।

'वित्तीय समिति' के कामकाज और उसके अस्तित्व को लेकर सोमवार को हुई सामान्य सभा में जमकर हंगामा हुआ। नगरसेवकों ने समिति पर विकास कार्यों में रोड़े अटकाने का आरोप लगाया, जबकि आयुक्त ने कड़े तेवर दिखाते हुए इसे अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा बताया।

विकास कार्यों में 'स्पीड ब्रेकर' बनी समिति ?

सामान्य सभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए सत्ताधारी और विपक्षी, दोनों ही दलों के नगरसेवकों ने वित्तीय समिति की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए, भाजपा के वरिष्ठ नगरसेवक पृथ्वीराज सुतार ने सीधे तौर पर समिति की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'जब शहर में निर्वाचित सदन और जन प्रतिनिधि सक्रिय हैं, तो प्रशासक काल में बनाई गई इस समिति का कोई औचित्य नहीं रह जाता। बजट में स्पष्ट प्रावधान होने के बाद भी फाइलों को इस समिति की मंजूरी के लिए महीनों तक अटकाया जाता है।'

नगरसेवकों के अधिकारों का हनन हो रहा

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नगरसेवक अरविंद शिंदे ने तकनीकी पेच फंसाते हुए प्रशासन को घेरा। शिंदे ने तर्क दिया कि आज कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पिछले दो-तीन वर्षों से केवल प्रशासनिक उलझनों के कारण धूल फांक रही हैं। मनपा कानून के अनुसार वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी देने का सर्वोच्च अधिकार 'स्थायी समिति' के पास है। ऐसे में एक समानांतर 'वित्तीय समिति' बनाकर प्रशासन क्या साबित करना चाहता है? उन्होंने इस समिति को नगरसेवकों के अधिकारों का हनन करार दिया।

मनपा कमिश्नर के कड़े तेवरः नाम बदलने की दी चेतावनी

नगरसेवकों के चौतरफा घेराव के बावजूद मनपा आयुक्त नवल किशोर राम अपने निर्णय पर अडिग नजर आए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि महानगर पालिका की वित्तीय स्थिति और उपलब्ध निधि को देखते हुए कार्यों की प्राथमिकता तय करना अनिवार्य है।

आयुक्त ने स्पष्ट किया, रसमिति का उद्देश्य किसी काम को रोकना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का सही प्रबंधन करना है। हम हर सोमवार को कार्यों की समीक्षा करते हैं। यह समिति मेरे प्रशासनिक विशेषाधिकार के अंतर्गत आती है। यदि नाम को लेकर कोई आपत्ति है, तो मैं इसका नाम बदलकर 'विशेष नियंत्रण समिति' कर सकता हूं, लेकिन नियंत्रण की प्रक्रिया जारी रहेगी।'

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