

Pune Municipal Corporation: पुणे शहर में मानसून के दौरान जलजमाव की समस्या को रोकने के लिए नालों और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज की सफाई पर महानगरपालिका (मनपा) पहले ही करीब 40 से 45 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
इसके बावजूद अब ‘स’ सूची के माध्यम से इन्हीं कार्यों के लिए दोबारा लाखों रुपये खर्च करने का प्रावधान किए जाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले में एक ही काम के लिए दोबारा खर्च किए जाने और संभावित दोहरे भुगतान की आशंका जताई जा रही है।
इस पूरे मामले में निविदा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि मलनिःसारण विभाग (जलमल निकासी विभाग) द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों में बदलाव कर कुछ ठेकेदारों के अनुकूल शर्तें रखी जा रही हैं। यदि निविदाओं की शर्तें किसी विशेष ठेकेदार को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं, तो इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। साथ ही, योग्य ठेकेदारों को समान अवसर मिलने पर भी सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित दस्तावेजों, कार्यों के विवरण और खर्च के प्रावधानों की जांच जरूरी मानी जा रही है।
पुणे मनपा हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले शहर के नालों, गटरों और जलनिकासी व्यवस्था की सफाई के लिए निविदाएं जारी करती है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य बारिश के दौरान पानी की निकासी सुचारु रखना और सड़कों तथा निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या को कम करना होता है। पहले नालों की सफाई और संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मलनिःसारण विभाग के माध्यम से निभाई जाती थी।
हालांकि, इस वर्ष कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए परिमंडल स्तर पर निविदाएं जारी की गईं। इसके साथ ही सफाई कार्यों के समन्वय की जिम्मेदारी आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी गई।
इस बदलाव के बाद विभिन्न विभागों के बीच कामकाज के बंटवारे, निगरानी और खर्च के हिसाब को लेकर स्पष्टता बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
एक ओर पुणे शहर मनपा द्वारा मानसून पूर्व सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की जानकारी है, वहीं दूसरी ओर समान प्रकृति के कार्यों के लिए दोबारा राशि निर्धारित किए जाने से खर्च के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ‘स’ सूची में शामिल कार्य पहले किए गए कार्यों से अलग हैं या उन्हीं कार्यों को दोबारा शामिल किया गया है।
यदि दोनों मदों में समान कार्य शामिल हैं, तो भुगतान से पहले उनकी जांच और कार्यस्थल पर किए गए काम का सत्यापन जरूरी होगा। इससे संभावित दोहरे भुगतान को रोका जा सकता है और सार्वजनिक धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित किया जा सकता है।
अब इस मामले में मनपा प्रशासन से निविदाओं की शर्तों, कार्यों के दायरे और खर्च के प्रावधानों पर स्पष्ट जानकारी दिए जाने की अपेक्षा की जा रही है। पारदर्शी जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अतिरिक्त खर्च की जरूरत वास्तव में है या नहीं।