पुणे महानगरपालिका चुनाव (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Pune News In Hindi: पुणे महानगरपालिका चुनाव में इस बार सिर्फ सत्ता का गणित ही नहीं बदला बल्कि कई स्थापित नेताओं की राजनीतिक गणनाएं भी पूरी तरह उलट गईं।
उम्मीदवार चयन में गड़बड़ी, पार्टी के भीतर बगावत, वंशवाद के प्रयोग और हाई वोल्टेज मुकाबलों की वजह से यह चुनाव खासा चर्चा में रहा। नतीजों के बाद मतदाताओं का फैसला कई नेताओं और दलों के लिए अप्रत्याशित और झटका देने वाला साबित हुआ।
भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस और अन्य दलों में टिकट को लेकर तीखे विवाद देखने को मिले। कई जगहों पर बगावत तो कुछ वाडों में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई। इसी पृष्ठभूमि में कुछ नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
चुनाव से पहले दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस गुटों के एक साथ आने की चर्चाओं ने पुणे की राजनीति को हिला दिया था। लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने इस एकजुटता का खुलकर विरोध किया। उन्होंने शरद पवार का साथ छोड़कर कांग्रेस में प्रवेश किया। वानवडी-सालुंखे विहार क्षेत्र से वे कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। उनके सामने कांग्रेस के पूर्व मंत्री बालासाहेब शिवरकर के पुत्र अभिजीत शिवरकर थे।
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इस प्रतिष्ठित मुकाबले में प्रशांत जगताप ने जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। पार्टी बदलने के बावजूद मतदाताओं ने उन पर भरोसा जताया जिससे यह परिणाम खास माना जा रहा है। एनसीपी (शरद पवार) के विधायक बापूसाहेब पठारे के पुत्र के भाजपा में जाने से यह मुकाबला भी खास चर्चा में रहा। पार्टी बदलने का नुकसान होने की अटकलों के बीच पठारे ने यहां भारी मतों से जीत दर्ज की।