PMC Election: टिकट सस्पेंस बरकरार, आज नामांकन का आखिरी दिन; पुणे की राजनीति में बढ़ा तनाव

Maharashtra Local Body Election: पुणे मनपा चुनाव में आज नामांकन का आखिरी दिन है, लेकिन टिकटों को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। गठबंधनों की खींचतान से उम्मीदवारों में तनाव बढ़ गया है।
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पुणे न्यूज (सौ. डिजाइन फोटो )
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Pune Municipal Election 2026: पुणे महानगरपालिका चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा आज समाप्त हो रही है, लेकिन राजनीतिक दलों में टिकटों को लेकर तस्वीर अब भी साफ नहीं है।

महायुति और महाविकास आघाड़ी जैसे प्रमुख गठबंधनों में सीटों के बंटवारे पर अंतिम सहमति न बनने से उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ गई है।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, मंगलवार दोपहर 3 बजे तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे। इसी के चलते शहर के 15 क्षेत्रीय कार्यालयों में अंतिम घंटों में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने संभावित अव्यवस्था से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था तैनात की है।

गठबंधनों में अंतिम क्षणों तक खींचतान

भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच कई वार्डों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। भाजपा ने करीब 100 सीटों पर नाम लगभग तय कर लिए हैं और कुछ उम्मीदवारों को एबी फॉर्म भी सौंपे गए हैं, लेकिन बगावत की आशंका के चलते आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई। इसी तरह महाविकास आघाड़ी में भी कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और शरद पवार गुट की एनसीपी के बीच अंतिम तालमेल पर बातचीत देर रात तक चलती रही।

फॉर्म बिके हजारों, नामांकन गिने-चुने

चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 10 हजार से ज्यादा नामांकन फॉर्म बिक चुके हैं, लेकिन औपचारिक रूप से पर्चा भरने वालों की संख्या काफी कम रही है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि अधिकांश दावेदार पार्टी के अंतिम संकेत का इंतजार कर रहे थे।

सोमवार को कई इलाकों में दिग्गज नेताओं ने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए नामांकन दाखिल किया। ढोल-ताशों और नारों के बीच हुए इन जुलूसों से माहौल और गर्म हो गया।

उम्मीदवारों में असमंजस

कई इच्छुक प्रत्याशियों ने पार्टी की मंजूरी मिले बिना ही निर्दलीय रूप में पर्चा भर दिया है, ताकि अंतिम समय में नामांकन से वंचित न रह जाएं। लंबे समय से अपने वार्ड में तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह अनिश्चितता तनाव का कारण बन गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन गणित के चलते कई मौजूदा पार्षदों के टिकट कट सकते हैं, जिससे बगावत और निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

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