Maharashtra News: चुनावी गड़बड़ी पर आयुक्त ने झाड़ा पल्ला, आरओ पर छोड़ा फैसला

Pune Municipal Corporation Election के दौरान अव्यवस्था और नियम उल्लंघन पर सवाल उठे हैं। आयुक्त नवल किशोर राम के “मैं सिर्फ मैनेजर हूं” बयान ने विवाद और बढ़ा दिया है।
Naval Kishore Ram
पुणे नगर निगम आयुक्त नवल किशोर राम (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: पुणे महानगर पालिका चुनाव प्रक्रिया के दौरान फैली प्रशासनिक अव्यवस्था और नियोजन की कमियों ने महानगर पालिका की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए महानगर पालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह केवल एक 'मैनेजर' की भूमिका में हैं और चुनाव निर्णय अधिकारियों (आरओ) के स्वतंत्र निर्णयों में हस्तक्षेप करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

अव्यवस्थाओं का अंबार; बता दें कि नामांकन पत्र दाखिल करने से लेकर उनकी छंटाई तक, हर स्तर पर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आरोप है कि चुनाव विभाग द्वारा समय पर अपडेटेड जानकारी साझा नहीं की जा रही है। जब भी प्रशासन से जवाब मांगा जाता है, तो आरओ से जानकारी न मिलने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। शहर में आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन हो रहा है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

सूची में हेरफेर से बढ़ा विवाद

  • प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण प्रभाग क्रमांक 27 (नवी पेठ-पर्वती) में देखने को मिला। यहां राकांपा (शरद पवार गुट) के उम्मीदवार अनिकेत क्षीरसागर के मामले में नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं।
  • 3 जनवरी को जारी आधिकारिक सूची को बदलकर 7 जनवरी को एक नई सूची सार्वजनिक की गई, जिस पर पुरानी तारीख (3) जनवरी) ही अंकित थी। बिना किसी लिखित स्पष्टीकरण के किए गए इस बदलाव ने चुनाव की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

आचार संहिता की उड़ी धज्जियां

हडपसर सहित कई क्षेत्रों में विसंगतियां पाई गई हैं। महानगर पालिका के बिजली के खंभों पर अवैध विज्ञापन चमक रहे हैं और चर्चा है कि मनपा की इमारतों का उपयोग चुनावी कार्यालयों और सामूहिक भोज के लिए किया जा रहा है। आयुक्त के 'मैनेजर' वाले बयान ने अब नागरिकों और राजनीतिक दलों के बीच इस भरोसे को और कम कर दिया है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे।