पुणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
PMC Action On Illegal Construction: शहर में अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे अवैध निर्माण कार्यों पर अंकुश लगाने के लिए अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है।
भविष्य में यदि किसी भी क्षेत्र में अवैध निर्माण पाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित जूनियर और असिस्टेंट इंजीनियर को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
लोहगांव इलाके में अवैध निर्माण पर हुई हालिया ‘तोडू कार्रवाई’ की गूंज गुरुवार को स्थायी समिति की बैठक में जोरदार तरीके से सुनाई दी। इस दौरान महानगर पालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट किया कि इस विषय में लापरवाह अधिकारियों पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
80 हजार वर्ग फुट पर अवैध निर्माण को किया ध्वस्त उल्लेखनीय है कि महानगर पालिका के अतिक्रमण व निर्माण निराकरण विभाग ने हाल ही में खराड़ी क्षेत्र में लगभग 80 हजार वर्ग फुट अवैध निर्माण को ध्वस्त किया था।
इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों के भारी विरोध के साथ-साथ एक महिला द्वारा आत्मदाह के प्रयास जैसी तनावपूर्ण स्थिति भी निर्मित हुई थी। स्थायी समिति की बैठक में इस घटनाक्रम पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने बताया कि सदस्य सुहास टिंगरे ने इस गंभीर मुद्दे की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। समिति सदस्यों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि महानगर पालिका निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ही क्यों जागती है?
जब अवैध निर्माण की शुरुआत होती है, उसी समय उसे क्यों नहीं रोका जाता? कई मामलों में बिल्डर द्वारा घर बनाकर बेच दिए जाने के बाद निगम की कार्रवाई होती है, जिसका खामियाजा निदर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ता है।
भिमाले ने निर्देश दिए कि अब जिस भी क्षेत्र में अवैध निर्माण मिलेगा, वहां के जिम्मेदार इंजीनियरों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। साथ ही, निर्माण विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मैनपावर भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत कॉन्ट्रैक्ट आधार पर 50 नए जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति की जाएगी। यदि किसी एक क्षेत्र में एक से अधिक अवैध निर्माण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मनपा सीमा के भीतर प्रस्तावित 35 करोड़ रुपये की वृक्ष गणना परियोजना पर स्थायी समिति ने रोक लगा दी है। उद्यान विभाग के इस महंगे प्रस्ताव को समिति ने नामंजूर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, शहर में वृक्षों की गणना अनिवार्य है और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी थी। चार कंपनियों में से मेसर्स सार आईटी रिसोर्सेस प्रा। लि। ने सबसे कम (0।7 प्रतिशत कम दर) 29 करोड़ 87 लाख 40 हजार रुपये का प्रस्ताव दिया था।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए मनपा प्रशासन एक विशेष टीम का गठन कर रहा है, जो पूरे शहर की समीक्षा करेगी। किसी को भी अवैध निर्माण को संरक्षण देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
– श्रीनाथ भिमाले, अध्यक्ष, स्थायी समिति
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मनपा के कुछ कर्मचारी अवैध निर्माण की तस्वीरें तो लेते हैं, लेकिन नोटिस जारी न करने और कार्रवाई को टालने के लिए अनुचित रास्ते अपनाते हैं, जिससे आम जनता का ही नुकसान होता है,
– सुहास टिंगरे, सदस्य, स्थायी समिति