Pune Municipal Corporation पुनर्गठन पर सियासत तेज, सुनेत्रा पवार की CM फडणवीस से शिकायत
Pune Municipal Corporation के पुनर्गठन को लेकर महायुति में विवाद गहराया है। सुनेत्रा पवार ने सीएम फडणवीस को पत्र लिखकर शिकायत की, जिसके बाद रिपोर्ट तलब की गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
सुनेत्रा पवार और देवेंद्र फडणवीस (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Municipal Corporation Restructing Row: बारामती उपचुनाव के लिए महायुति की ओर से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का प्रचार शुरू होने के बीच, दूसरी ओर पुणे महानगरपालिका में महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है।
पुणे महानगरपालिका में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद राकां (अजीत गुट) को बड़ा झटका लगा है और उनके हाथ से एक महत्वपूर्ण अवसर प्रशासनिक निर्णय के कारण निकल गया है। इसी मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है।
Pune Municipal Corporation के क्षेत्रीय कार्यालयों के पुनर्गठन को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने इस पुनर्गठन पर सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखित शिकायत की है। चर्चा है कि महापालिका प्रशासन द्वारा बनाई गई नई संरचना राजनीतिक रूप से प्रेरित और त्रुटिपूर्ण है। सुनेत्रा के पत्र के बाद मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर विकास विभाग से तुरंत रिपोर्ट मांगी है।
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Pune Municipal Corporation से सीएम फडणवीस ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे महानगरपालिका प्रशासन से इस पुनर्गठन पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन ने यह निर्णय किन मानकों के आधार पर लिया, इसकी जांच अब नगर विकास विभाग द्वारा की जाएगी, इसलिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह पुनर्गठन रद्द किया जाएगा या नहीं।
भाजपा का 14 प्रभाग समितियों पर वर्चस्व
पुणे महानगरपालिका चुनाव के बाद प्रशासन द्वारा 15 क्षेत्रीय कार्यालयों का पुनर्गठन किया गया था। लेकिन इस नई संरचना के कारण भाजपा का 14 प्रभाग समितियों पर वर्चस्व बनता दिख रहा है, जबकि कांग्रेस को केवल एक समिति मिलने की स्थिति है। चौंकाने वाली बात यह है कि महापालिका में दूसरी सबसे बड़ी ताकत होने के बावजूद राकां (अजीत गुट) को एक भी प्रभाग समिति में जगह नहीं मिल रही है।
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सुनेत्रा ने अपने पत्र में कहा है कि पुनर्गठित क्षेत्रीय कार्यालयों की संरचना भौगोलिक रूप से गलत है जिसके कारण आम नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही यह भी आरोप है कि प्रशासनिक कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप कर जानबूझकर राष्ट्रवादी को बाहर रखा जा रहा है जिसकी चर्चा महानगरपालिका में तेज है।
